अन्य

आपराधिक लापरवाही का संकेत

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड ने प्रशासनिक पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज।

मंदिर का प्रशासनिक तंत्र पारदर्शिता और आंतरिक नियंत्रण के मोर्चे पर बुरी तरह विफल रहा। कड़ी सुरक्षा के बावजूद इस तरह के कृत्य का होना आपराधिक मिलीभगत या कम-से-कम आपराधिक लापरवाही का संकेत है।

मुकदमा दर्ज होने और आठ लोगों की गिरफ्तारी के साथ इसकी पुष्टि हो गई है कि अयोध्या के राम मंदिर में करोड़ों रुपये की चढ़ावा चोरी हुई। पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से लगभग 80 लाख रुपये बरामद करने का दावा भी किया है। यह मंदिर की पवित्रता को कलंकित करने वाला ऐसा कांड है, जिससे करोड़ों हिंदू श्रद्धालु खुद को ठगा गया महसूस कर रहे हैं। चढ़ावे में हेराफेरी को केवल वित्तीय भ्रष्टाचार का मामला नहीं माना जा सकता, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं साथ घोर विश्वासघात भी है।

जिस मंदिर की सुरक्षा को अभेद्य और जहां की निगरानी व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताया जाता हो, वहां दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी ना सिर्फ प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि इससे प्रबंधन से जुड़ी बड़ी शख्सियतों की मंशा और ईमानदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अब तक जिन पर मुकदमा दायर हुआ है, वे प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी हैं। जैसाकि कई साधु-संतों ने कहा है कि इतना बड़ा घोटाला अदने कर्मचारियों अंजाम दे दें, यह बात गले नहीं उतरती। इसीलिए राम जन्म भूमि न्यास के बड़े पदाधिकारियों की ना सिर्फ नैतिक, बल्कि अन्य रूपों में उनकी जवाबदेही बनती है। यह स्पष्ट है कि मंदिर का प्रशासनिक तंत्र पारदर्शिता और आंतरिक नियंत्रण के मोर्चे पर बुरी तरह विफल रहा।

फिर इसकी अनदेखी भी नहीं की जा सकती कि मंदिर के लिए जमीन खरीद से लेकर, चंदे, निर्माण कार्यों, और अब चढ़ावा में घपले और ख़यानत के इल्जाम लगे हैं। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इस तरह के कृत्य का होना वहां आपराधिक मिलीभगत या कम-से-कम आपराधिक लापरवाही का संकेत है।

इसलिए इस आशंका में दम है कि कार्रवाई को सतही पड़ताल तक सीमित रखने और या निचले स्तर के कर्मचारियों पर ठीकरा फोड़ कर मामले को निपटा देने की कोशिश हो सकती है। लेकिन जरूर याद रखना चाहिए है कि सभी दोषियों को सख्त सजा नहीं दी गई, तो यह ‘चढ़ावा कांड ना केवल अयोध्या के प्रबंधन, बल्कि धर्म के नाम पर बनी तमाम संस्थाओं की साख को हमेशा के लिए संदिग्ध बना देगा।

Shivram Giri

शिवराम गिरि वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 17 वर्षों का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला और भारत समाचार जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता के हर माध्यम पर उनकी मज़बूत पकड़ उन्हें मीडिया जगत में एक विश्वसनीय आवाज बनाती है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी पहचान है।

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button