अयोध्या: भाजपा बूथ अध्यक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भोजन को लेकर विवाद, कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट
मिल्कीपुर के कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज में आयोजित भाजपा बूथ अध्यक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भोजन वितरण में विवाद हो गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट के आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अयोध्या/मिल्कीपुर। अयोध्या के मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित भाजपा बूथ अध्यक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भोजन वितरण के समय विवाद हो गया। आरोप है कि रोटी वितरण को लेकर शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। घटना के बाद दोनों पक्षों ने कुमारगंज थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
भोजन वितरण के दौरान हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज के ऑडिटोरियम में हैरिंग्टनगंज, अमानीगंज और मिल्कीपुर मंडलों के बूथ अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
दोपहर में भोजन वितरण के दौरान कथित रूप से रोटी को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि इसी दौरान अमानीगंज मंडल महामंत्री सर्वेश तिवारी और नगर पंचायत कुमारगंज के सभासद एवं भाजपा कार्यकर्ता रवि सिंह के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हो गई।
दोनों पक्षों ने लगाए एक-दूसरे पर आरोप
सर्वेश तिवारी ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने यह भी कहा कि बीच-बचाव करने पहुंचे पवन गुप्ता के साथ भी मारपीट की गई।
वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से रवि प्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि भोजन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सर्वेश तिवारी उन्हें अपशब्द कह रहे थे। विरोध करने पर उनके रिश्तेदार रोनित सिंह के साथ मारपीट की गई।
पुलिस ने शुरू की जांच
कुमारगंज थाना प्रभारी सुरेश कुमार पटेल ने बताया कि दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त हुई है। उन्हें जांच पर्ची दे दी गई है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय में राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई कि आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में लगातार राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने शैक्षणिक संस्थान में राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।





