जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर रोक की मांग, राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
प्रतापगढ़ में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने की प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। छात्रहित और शिक्षा व्यवस्था को बचाने की अपील की गई।

प्रतापगढ़।
समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई है। सोमवार को जिलाध्यक्ष साबिर अली के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर महामहिम राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी न्यायिक को सौंपा।
जिलाध्यक्ष साबिर अली ने कहा कि विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण, भूमि या नक्शे से संबंधित कोई विवाद है तो उसका समाधान संविधान, कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शिक्षा व्यवस्था को नुकसान न पहुंचे।
ज्ञापन में दावा किया गया कि विश्वविद्यालय का निर्माण उस समय हुआ था, जब ग्राम सींगनखेड़ा न तो पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्माण अनुमति की बाध्यता वाले क्षेत्र में था और न ही रेगुलेटेड एरिया में शामिल था। साथ ही यह भी कहा गया कि 27 सितंबर 2024 को ग्राम सींगनखेड़ा पहली बार रामपुर विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में शामिल किया गया, जबकि विश्वविद्यालय का निर्माण उससे पहले ही पूरा हो चुका था। समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने आरोप लगाया कि भवन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शिक्षा और छात्रहित के विपरीत है तथा इससे गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
सभा ने राज्यपाल से मांग की कि जनहित और छात्रहित को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को निरस्त कर निष्पक्ष एवं विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित कराया जाए।
इस दौरान जिला महासचिव अब्दुल कादिर जिलानी, आशुतोष पाण्डेय, वकार अहमद, डॉ. रामबहादुर पटेल, साजिद अली, मनीष पाल, मो. इरफान खान, निसार अहमद, शहरे आलम, जावेद अख्तर सहित बड़ी संख्या में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।





