
प्रतापगढ़।
कोतवाली देहात क्षेत्र के कादीपुर गांव निवासी बसंत कुमार गौतम ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कथित वसूली और धमकाने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। शिकायत में गांव के कथित पत्रकार मनोज कुमार चौधरी और सिपाही विकास कुमार वैश्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, करीब तीन-चार वर्ष पहले उसका पुत्र नितेश कुमार गौतम गांव के कुछ लोगों के साथ सई नदी किनारे शौचालय गया था। आरोप है कि इसी दौरान मनोज कुमार चौधरी ने उसके साथ अभद्रता की और कथित तौर पर तमंचा दिखाकर डराने का प्रयास किया। शिकायत में कहा गया है कि इसी घटना का कथित रूप से वीडियो भी बना लिया गया था।
वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 30 हजार रुपये लेने का आरोप
बसंत कुमार का आरोप है कि घटना के बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसके पुत्र नितेश से कथित तौर पर 30 हजार रुपये लिए गए। आरोप है कि दोबारा रुपये देने से इनकार करने पर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी गई। इसके साथ ही कथित रूप से नितेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का दबाव भी बनाया गया।
घर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी धमकी देने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि 9 अगस्त को करीब 11:30 बजे चौकी इंचार्ज के साथ तीन-चार पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे। आरोप है कि सिपाही विकास कुमार वैश्य ने नितेश को चौकी पर पेश करने के लिए दबाव बनाया और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके अन्य दो बेटों को भी फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई। बसंत कुमार ने यह भी कहा है कि मामले की सूचना 1076 पर देने के बावजूद कथित तौर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
मोबाइल फोन से 70 हजार रुपये मांगने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने एक मोबाइल नंबर से फोन कर कथित तौर पर 70 हजार रुपये मांगने का भी आरोप लगाया है। बसंत कुमार के अनुसार, उसके पास कथित बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसे जांच के दौरान पुलिस के सामने उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए पत्रकार मनोज कुमार चौधरी और सिपाही विकास कुमार वैश्य के खिलाफ अवैध वसूली, धमकी समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई
फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित वीडियो, कॉल रिकॉर्डिंग तथा रुपये की मांग से जुड़े दावों में क्या तथ्य सामने आते हैं।





