
प्रतापगढ़।
अधिवक्ता के पेशे की आड़ में कथित फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई तेज हो गई है। प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में बार कौंसिल के सचिव आरके शुक्ला की तहरीर पर दर्ज प्राथमिकी में प्रतापगढ़ के चार लोगों के नाम सामने आने के बाद जिले के न्यायिक और अधिवक्ता गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
प्राथमिकी में रफी उल्ला निवासी पूरे मुस्तफा खान, सत्यम मिश्रा निवासी रहवई जगदीशपुर, राम प्रकाश पांडेय निवासी प्रेमधन पट्टी और माता प्रसाद पाण्डेय निवासी प्रेमधन पट्टी के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। मामले की जांच प्रयागराज पुलिस कर रही है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई फर्जी वकीलों की जांच
हाईकोर्ट के आदेश के बाद ऐसे लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज की गई है, जो कथित तौर पर अधिवक्ता के रूप में नियमों के विपरीत प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसी क्रम में बार कौंसिल स्तर से भी दस्तावेजों और पंजीकरण की जांच की जा रही है।
सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि नामजद लोगों की भूमिका क्या रही और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच आगे बढ़ने पर मामले से जुड़े अन्य तथ्य या नाम भी सामने आ सकते हैं।
प्रतापगढ़ के चार नामों से बढ़ी बेचैनी
प्राथमिकी में प्रतापगढ़ के चार लोगों के नाम सामने आने के बाद जिले में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करने वालों के दस्तावेज, पंजीकरण और पेशे से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
जूनियर बार के अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्र ने बताया कि फर्जी वकीलों की जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई आगे भी होती रहेगी।
जांच के बाद तय होगी आरोपों की सच्चाई
मामले में सबसे अहम बात पुलिस जांच की रिपोर्ट होगी। प्राथमिकी में नाम दर्ज होने मात्र से किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं होते। नामजद लोगों की भूमिका और आरोपों की पुष्टि जांच तथा आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फर्जी अधिवक्ताओं के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई को न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब निगाहें पुलिस जांच और बार कौंसिल की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।





