गोण्डाताज़ा ख़बर

घाघरा नदी का कहर, 2.53 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद 2 मकान और 1 बीघा जमीन नदी में समाई

गोण्डा में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से तरबगंज और कर्नलगंज क्षेत्र में तेज कटान शुरू हो गई है। 2.53 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद 2 मकान और 1 बीघा जमीन नदी में समा गई। कई परिवारों पर पलायन का संकट मंडरा रहा है।

 घाघरा का बढ़ता जलस्तर बना आफत

गोण्डा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तरबगंज और कर्नलगंज के तटीय इलाकों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। नदी की तेज कटान के चलते कई परिवारों के सामने अपना आशियाना बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक दो मकान नदी में समा गए, जबकि एक बीघा से अधिक कृषि भूमि भी कटान की भेंट चढ़ गई।

 रात में बहा पक्का मकान, सुबह फूस का घर भी समाया

तरबगंज तहसील के नवाबगंज स्थित दत्तनगर मांझा गांव में सोमवार रात करीब एक बजे दिनेश यादव का तीन कमरों का पक्का मकान घाघरा नदी की कटान में पूरी तरह बह गया। मंगलवार सुबह गांव का एक फूस का मकान भी नदी में समा गया। गांव के कई अन्य मकान अब भी कटान की जद में हैं, जिससे लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।

 2.53 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बढ़ी चिंता

मंगलवार सुबह घाघरा नदी में कुल 2,53,666 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें गिरजा बैराज से 1,17,776 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,31,337 क्यूसेक और सरयू बैराज से 4,553 क्यूसेक पानी शामिल है। जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका के चलते प्रशासन भी सतर्क हो गया है। फिलहाल एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।

सरकारी मदद का इंतजार, ग्रामीणों में नाराजगी

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही कटान के बावजूद अब तक उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि अभी तक कोई अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेने नहीं आया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

 प्रशासन ने सर्वे शुरू करने का किया दावा

जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि कटान प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है। नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद पात्र परिवारों को शासन के नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

 पलायन की तैयारी में जुटे ग्रामीण

कटान की रफ्तार लगातार बढ़ने से गांव के कई परिवारों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो कई और मकान नदी में समा सकते हैं। ऐसे में लोगों के सामने पलायन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

Girijesh Tiwari

गिरिजेश तिवारी वरिष्ठ एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में लंबे समय का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा और यूनाइटेड भारत जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में प्रतापगढ़ से दैनिक पॉड के संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button