लखनऊ में नवजात को फर्जी दस्तावेजों के सहारे सौंपने का खुलासा, दो महिलाएं गिरफ्तार, अस्पताल भी जांच के दायरे में
लखनऊ के गुडम्बा में फर्जी दस्तावेज तैयार कर नवजात शिशु को अवैध रूप से दूसरी महिला को सौंपने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

लखनऊ:
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नवजात शिशु के अवैध हस्तांतरण का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस कमिश्नरेट की अपराध शाखा और गुडम्बा थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी चिकित्सीय दस्तावेज तैयार कर नवजात को दूसरी महिला को सौंपने के मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जबकि संबंधित अस्पताल, चिकित्सकों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
पुलिस के अनुसार, 3 अगस्त को सूचना मिली थी कि गुडम्बा क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में जन्मे नवजात शिशु को उसकी जैविक मां से अलग कर दूसरी महिला को सौंप दिया गया। इतना ही नहीं, अस्पताल के रिकॉर्ड में वास्तविक प्रसूता की जगह दूसरी महिला का नाम दर्ज कर फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए।
जांच के दौरान नवजात रेनू शर्मा के पास मिला। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि बच्चा उसका जैविक पुत्र नहीं है और उसे आरती देवी ने सौंपा था। इसके बाद आरती देवी से पूछताछ में सामने आया कि पहले से तीन बच्चे होने के कारण उसने अपना नवजात रेनू शर्मा को दे दिया था।
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि अस्पताल के प्रसव और डिस्चार्ज रिकॉर्ड में वास्तविक मां की जगह दूसरी महिला का नाम दर्ज किया गया था। प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(2), 319(2), 336(3) और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धाराओं 80 और 81 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
दोनों महिलाओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। वहीं, नवजात शिशु को बाल कल्याण समिति के आदेश पर राजकीय बाल गृह (शिशु), प्राग नारायण रोड में सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। अस्पताल के मूल रिकॉर्ड, जन्म और डिस्चार्ज दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक एवं वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस मामले में किसी संगठित गिरोह, अस्पताल के डॉक्टरों या कर्मचारियों की संलिप्तता तो नहीं है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया केवल केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) और किशोर न्याय अधिनियम के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से ही पूरी करें। निजी समझौते, फर्जी दस्तावेज या बिचौलियों के माध्यम से नवजात का हस्तांतरण कानूनन अपराध है।





