प्रतापगढ़ की पहचान है सामाजिक सौहार्द, यहां न हिंदू-मुसलमान लड़ते हैं न सिया-सुन्नी : रामानुज दास
प्रतापगढ़ में सावन और कांवड़ यात्रा को लेकर आयोजित शांति समिति की बैठक में धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि प्रतापगढ़ की पहचान सामाजिक सौहार्द और भाईचारा है। उन्होंने कांवड़ियों से अनुशासन और प्रशासन के सहयोग की अपील की।

प्रतापगढ़। सावन माह के दौरान जनपद में शांति, सौहार्द और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस लाइन स्थित राजा दिनेश सिंह सभागार में शासन के निर्देश पर आयोजित बैठक में धर्मगुरुओं, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने सहभागिता की। बैठक में सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि प्रतापगढ़ सदैव से शांति और भाईचारे की मिसाल रहा है। उन्होंने कहा, “प्रतापगढ़ में न हिंदू-मुसलमान लड़ते हैं, न सिया-सुन्नी और न ही अगड़े-पिछड़े। आपसी सौहार्द और समरसता ही इस जिले की सबसे बड़ी पहचान है।”
उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ की धरती संतों, महापुरुषों और सूफी परंपरा की भूमि रही है। धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी ने यहीं से विश्व कल्याण का संदेश दिया। वहीं भिखारी दास, नाज़िश प्रतापगढ़ी, अड्डा प्रसाद उन्मत्त, इम्तियाजउद्दीन साहब, जुमई खां आजाद, मौलाना यार साहब और मौलाना अहमद साहब पुरी जैसे संतों और विद्वानों ने सामाजिक समरसता और भाईचारे की शिक्षा देकर जिले की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया।
धर्माचार्य ने कहा कि सावन के दौरान निकलने वाली कांवड़ यात्रा की सफलता में जितनी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और समाज की है, उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी स्वयं कांवड़ियों की भी है।
उन्होंने अपील की कि कांवड़िए अनुशासन का पालन करें, निर्धारित मार्ग पर चलें, डीजे का मर्यादित उपयोग करें तथा अशोभनीय गीतों से बचें। ऐसा होने पर आमजन भी उनका सम्मान और स्वागत करेगा।
उन्होंने प्रशासन का सहयोग करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताया।
बैठक के दौरान धर्माचार्य ने जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को ‘मां वाराही महात्म्य’ पुस्तक भेंट की। उन्होंने श्रीमद्वाल्मीकि रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि “अयोध्या का अर्थ ही वह स्थान है, जहां युद्ध न हो। प्रतापगढ़ भी उसी परंपरा का प्रतीक है और यहां की शांति एवं सद्भाव की संस्कृति इसे विशेष पहचान प्रदान करती है।”
बैठक में उपस्थित अधिकारियों और धर्मगुरुओं ने सावन माह, कांवड़ यात्रा और आगामी पर्वों के दौरान शांति, कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों पर बल दिया।





