प्रतापगढ़ में पोषाहार वितरण पर सवाल, गोदाम से राशन उठाने को मजबूर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां
प्रतापगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने डीएम और सीडीओ से शिकायत कर आरोप लगाया कि शासनादेश के विपरीत उन्हें गोदाम और रास्ते में खड़े वाहनों से पोषाहार उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। केंद्र तक पोषाहार पहुंचाने के नियमों के पालन पर सवाल उठे हैं।

प्रतापगढ़।
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषाहार वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने आरोप लगाया है कि शासनादेश में केंद्र तक पोषाहार पहुंचाने का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद उन्हें गोदाम और बीच रास्ते में खड़े वाहनों से राशन उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मामले की शिकायत जिलाधिकारी (डीएम) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) से की गई है।
डीएम और सीडीओ को भेजी गई शिकायत
संडवा चंद्रिका, सांगीपुर और बाबा बेलखरनाथ धाम बाल विकास परियोजनाओं की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने संयुक्त शिकायत में आरोप लगाया है कि सप्लायर द्वारा पोषाहार सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक नहीं पहुंचाया जाता। इसके बजाय कार्यकत्रियों को गोदाम पर बुलाया जाता है या फिर सेक्टर के बीच वाहन खड़ा कर वहीं से राशन लेने के लिए कहा जाता है।
कार्यकत्रियों का कहना है कि इससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है और शासन की तय व्यवस्था का भी पालन नहीं हो रहा।
शासनादेश में केंद्र तक आपूर्ति का प्रावधान
सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 की अनुसूची-2 के तहत जारी शासनादेश में रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार की आपूर्ति सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा पोषाहार वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली, क्यूआर कोड और परिवहन वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया गया है, ताकि सामग्री की आपूर्ति और लाभार्थियों तक वितरण की निगरानी की जा सके।
अधिकारियों के आदेश का हवाला देने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब कार्यकत्रियां सप्लायर से केंद्र तक पोषाहार न पहुंचाने का कारण पूछती हैं तो उन्हें जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) और बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के आदेश का हवाला दिया जाता है।
कार्यकत्रियों ने मांग की है कि शासनादेश का पालन कराते हुए पोषाहार सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाए और गोदाम से राशन उठाने की व्यवस्था तत्काल समाप्त की जाए।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
मामले ने बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो पोषाहार वितरण व्यवस्था में लापरवाही और शासनादेश के उल्लंघन का मामला सामने आ सकता है।





