1100 से अधिक पुलिस अधिकारियों को मिली फॉरेंसिक और मेडिको-लीगल जांच की ट्रेनिंग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज में कार्यशाला संपन्न
प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पांच दिवसीय मेडिको-लीगल और फॉरेंसिक कार्यशाला का समापन हुआ। 1100 से अधिक पुलिस अधिकारियों को अपराध स्थल प्रबंधन, वैज्ञानिक साक्ष्य संरक्षण और आधुनिक फॉरेंसिक जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

प्रयागराज
अपराधों की वैज्ञानिक जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन), प्रयागराज के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया। इस कार्यशाला में प्रयागराज कमिश्नरेट के 1100 से अधिक पुलिस अधिकारियों को मेडिको-लीगल मामलों की वैज्ञानिक विवेचना और फॉरेंसिक जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
1100 से अधिक पुलिस अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण
कार्यशाला में प्रयागराज कमिश्नरेट के सभी सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), अपर पुलिस आयुक्त (Addl. CP) और अन्य पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। पांच दिनों तक चले प्रशिक्षण में अधिकारियों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों और मेडिको-लीगल प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
अपराध स्थल प्रबंधन से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक की मिली जानकारी
विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों को अपराध स्थल (Crime Scene) के वैज्ञानिक प्रबंधन, साक्ष्य संरक्षण एवं संकलन, घटनास्थल का निरीक्षण और दस्तावेजीकरण, शव के सुरक्षित परिवहन, ट्रेस एविडेंस की पहचान और पैकेजिंग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की वैज्ञानिक व्याख्या तथा आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण दिया।
हर दिन हुए पांच शैक्षणिक सत्र
कार्यशाला के दौरान प्रतिदिन चार शैक्षणिक सत्र और एक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। पहले सत्र में घटनास्थल को सुरक्षित रखने, भीड़ नियंत्रण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के मानकों पर चर्चा हुई। दूसरे सत्र में शव को सुरक्षित तरीके से उठाने, परिवहन और मॉर्चरी तक पहुंचाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
वैज्ञानिक जांच से मजबूत होंगे आपराधिक मुकदमे
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार राय ने कहा कि पुलिस विवेचना को वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित बनाना समय की आवश्यकता है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों, उपकरणों और सावधानियों से परिचित कराना है, ताकि अपराधों की जांच अधिक सटीक और प्रभावी हो सके।





