
प्रतापगढ़।
आर्य समाज चौक, प्रतापगढ़ की प्रबंध समिति में करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितताओं और दस्तावेजों में कथित कूटरचना का मामला सामने आया है। संस्था के पूर्व प्रधान राम कृपाल आर्य और पूर्व उपप्रधान रामेश्वर आर्य ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संस्था के नए भवन और दुकानों के निर्माण के लिए समाज के लोगों से किस्तों में लगभग 1 करोड़ 99 लाख 40 हजार रुपये एकत्र किए गए थे। संस्था के तत्कालीन कोषाध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने निर्माण कार्य और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता नहीं बरती तथा प्रबंध समिति और सदस्यों को कैश बुक, रसीद बुक, बैंक पासबुक, कार्रवाई रजिस्टर सहित अन्य अभिलेख कभी नहीं दिखाए।
पूर्व पदाधिकारियों का आरोप है कि संस्था के लगभग 30 लाख रुपये बिना अधिकार एक व्यापारी के यहां नकद रखवा दिए गए। बाद में जांच के दौरान करीब 5 लाख रुपये व्यापारी से तथा 7 लाख रुपये आरोपित के पास से वापस लिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि चार दुकानों से प्राप्त मासिक किराया भी संस्था के खाते में जमा नहीं किया गया। 
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि संस्था के वित्तीय अभिलेखों में कूटरचना कर निर्माण संबंधी रसीदें और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए तथा संस्था के महत्वपूर्ण अभिलेख अपने कब्जे में रखे गए। विरोध करने पर धमकी देने और झूठे मुकदमों में फंसाने की चेतावनी देने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायती पत्र के अनुसार, आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश द्वारा संस्था में प्रशासक नियुक्त किए जाने के बाद आंतरिक जांच में भी कई वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि धार्मिक संस्था में हुए कथित वित्तीय घोटाले, गबन, जालसाजी और दस्तावेजों में कूटरचना की गहन जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।





