एसी किराया प्रकरण ने पकड़ा तूल, अब विधायक ने मुख्यमंत्री से मांगी उच्चस्तरीय जांच
प्रतापगढ़ के डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में एसी किराया प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। सदर विधायक डॉ. आर.के. वर्मा ने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच की मांग की है। मामला 3 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में भी गूंज सकता है।

प्रतापगढ़।
डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में GeM पोर्टल के माध्यम से एयर कंडीशनर (एसी) किराये पर लेने के मामले में पहले मीडिया द्वारा उठाए गए सवाल अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुके हैं।
करोड़ों रुपये के इस चर्चित प्रकरण में अब सदर विधायक एवं विधानसभा की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के सदस्य डॉ. आर.के. वर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की है।
गौरतलब है कि इससे पहले प्रकाशित खबरों में बताया गया था कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने GeM पोर्टल के माध्यम से एक ही दिन में बड़ी संख्या में एसी किराये पर लेने का अनुबंध किया, जिसमें प्रति एसी कुछ घंटों के किराये की दर लगभग एक लाख रुपये तक पहुंचने का दावा सामने आया था।
इस पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी थी, लेकिन विवाद थमने के बजाय और गहरा गया।
अब विधायक डॉ. आर.के. वर्मा ने 28 जुलाई को मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में सामने आए तथ्यों से गंभीर वित्तीय अनियमितता की आशंका उत्पन्न होती है। उन्होंने मांग की है कि GeM पोर्टल पर हुई टेंडर प्रक्रिया, निर्धारित दरों और वित्तीय नियमों की निष्पक्ष जांच किसी उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच समिति से कराई जाए।
अपने पत्र में विधायक ने यह भी उल्लेख किया है कि मेडिकल कॉलेज में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और जांच सुविधाओं का अभाव बना रहता है तथा गंभीर मरीजों को प्रयागराज सहित अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में कुछ घंटों के लिए एसी किराये पर लाखों रुपये खर्च करने का मामला स्वाभाविक रूप से सवालों के घेरे में है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन भले ही उच्चाधिकारियों को अपनी सफाई देकर संतुष्ट करने का प्रयास करे, लेकिन विधानसभा की लोक लेखा समिति के सदस्य के रूप में डॉ. आर.के. वर्मा वित्तीय प्रक्रियाओं और सरकारी व्यय की गहन जांच का अनुभव रखते हैं। ऐसे में इस मामले को केवल एक प्रेस विज्ञप्ति से शांत कर पाना आसान नहीं होगा।
उधर, 3 अगस्त से उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। यदि डॉ. आर.के. वर्मा इस मुद्दे को सदन में उठाते हैं तो सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली के कारण सरकार की भी किरकिरी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को भी भेजी गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस बहुचर्चित प्रकरण में जांच के आदेश देता है या मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सफाई को पर्याप्त मानता है।





