16 करोड़ मिले, फिर भी टेंडर नहीं! विधायक के विकास पर जिला पंचायत की सुस्ती भारी
प्रतापगढ़ में 39 एएनएम सेंटरों के निर्माण के लिए फरवरी में 16 करोड़ रुपये मिलने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। जिला पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य की शिकायत के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी।

प्रतापगढ़। शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए फरवरी में जिले को 39 एएनएम सेंटरों के निर्माण के लिए करीब 16 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध करा दी, लेकिन महीनों गुजरने के बाद भी निर्माण कार्य की पहली सीढ़ी यानी टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी। निर्माण की जिम्मेदारी जिला पंचायत को सौंपी गई है। ऐसे में करोड़ों की धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद विकास कार्यों की रफ्तार थमने से जिला पंचायत की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी की कथित लापरवाही और कार्यशैली को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की थी। विधायक ने विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की मांग की थी। इसके बावजूद 39 एएनएम सेंटरों के निर्माण के लिए अब तक टेंडर न निकलना प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।
पैसा मिला पर जिला पंचायत ने रोकी रफ्तार!
फरवरी में शासन से धनराशि मिलने के बाद उम्मीद थी कि जिला पंचायत तत्काल निविदा प्रक्रिया शुरू कराकर निर्माण कार्य को धरातल पर उतारेगी। लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। नतीजा यह है कि 16 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद 39 स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
यह सेंटर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके निर्माण से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में देरी का सीधा असर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
विधायक की शिकायत भी बेअसर?
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी की कार्यशैली को लेकर सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत किए जाने के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा। लेकिन शिकायत के बावजूद टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किस स्तर पर फाइल अटकी है और कौन जिम्मेदार है?
विधायक लगातार क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर सक्रिय हैं। ऐसे में शासन से स्वीकृति और धनराशि मिलने के बावजूद कार्यदाई संस्था की ओर से टेंडर में देरी जनप्रतिनिधि के विकास एजेंडे पर भी पानी फेरती नजर आ रही है।
चुनावी वर्ष में विकास की फाइलों पर ब्रेक!
चुनावी वर्ष में जनप्रतिनिधियों के लिए विकास कार्यों को धरातल पर उतारना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में करोड़ों की धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद महीनों तक टेंडर न निकलना जिला पंचायत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सवाल सीधा है—जब फरवरी में ही 16 करोड़ रुपये मिल गए थे तो आखिर कई महीने बाद भी टेंडर क्यों नहीं निकला? क्या जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय होगी? क्या जिलाधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर 39 एएनएम सेंटरों के निर्माण की प्रक्रिया को गति देंगे?
अब देखना यह है कि करोड़ों की धनराशि और विधायक की शिकायत के बावजूद सुस्त पड़ी जिला पंचायत की व्यवस्था कब जागती है और 39 एएनएम सेंटरों के निर्माण का टेंडर कब निकलता है।





