मेरठ में फर्जी पुलिस चौकी का पर्दाफाश: नकली CO, थानेदार और पुलिसकर्मी गिरफ्तार, न्यूड कॉल से फंसाकर करते थे लाखों की वसूली
मेरठ में फर्जी पुलिस चौकी चलाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। नकली CO, थानेदार और पुलिसकर्मी बनकर आरोपी न्यूड वीडियो कॉल के जरिए लोगों को ब्लैकमेल कर लाखों रुपये की वसूली करते थे।

मेरठ।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने कथित तौर पर फर्जी पुलिस चौकी बनाकर खुद को CO, थानेदार और पुलिसकर्मी बताकर लोगों से लाखों रुपये की अवैध वसूली का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। मामले का खुलासा एक युवक की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर कई चौंकाने वाले सामान बरामद किए हैं, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
न्यूड वीडियो कॉल के जरिए जाल में फंसाते थे शिकार
ब्रह्मपुरी निवासी नीरज पाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एक युवती ने उसे न्यूड वीडियो कॉल कर अपने झांसे में लिया और मिलने के लिए बुलाया। तय स्थान पर पहुंचते ही खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले लोग उसे कथित पुलिस चौकी ले गए।
वहां आरोपियों ने खुद को CO और थानेदार बताते हुए एनकाउंटर और जेल भेजने की धमकी दी तथा दो लाख रुपये की मांग की। डर के कारण पीड़ित ने 10 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का एहसास होने पर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
छापे में मिली फर्जी पुलिस चौकी, वॉकी-टॉकी और फर्जी दस्तावेज
शिकायत के आधार पर पुलिस ने राहुल पाल और आकाश को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से ऑल्टो कार, मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, वॉकी-टॉकी, फर्जी फाइलें और कई दस्तावेज बरामद किए गए।
पूछताछ के बाद पुलिस ने मोहकमपुर स्थित कथित फर्जी पुलिस चौकी पर छापा मारा। वहां बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी के चित्र भी लगे मिले, जिससे लोगों को यह असली पुलिस चौकी होने का भ्रम हो।
फर्जी पुलिस बनकर करते थे अवैध वसूली
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपने जाल में फंसाकर फर्जी पुलिस चौकी लाते थे। इसके बाद जेल भेजने या एनकाउंटर की धमकी देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
पुलिस के मुताबिक गिरोह का एक सदस्य शशांक और दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
जांच में हो सकते हैं और बड़े खुलासे
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों, कथित सहयोगियों और संभावित पीड़ितों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





