ऑपरेशन ‘साइवज्र’ में यूपी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 4 सरगना गिरफ्तार, ₹18.50 लाख कैश बरामद
यूपी पुलिस के ऑपरेशन 'साइवज्र' के तहत लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया गया। चार सरगना गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस ने ₹18.50 लाख नकद, 31 लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए।

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष अभियान ‘ऑपरेशन साइवज्र’ के तहत कमिश्नरेट लखनऊ पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। विभूतिखंड इलाके में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर पुलिस ने गिरोह के चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान 18.50 लाख रुपये नकद, 31 लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, दो राउटर और बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अमेरिका के नागरिकों को फर्जी Apple Customer Support के नाम पर झांसा देकर साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
मुखबिर की सूचना पर हुई छापेमारी
पुलिस ने बताया कि 22 जुलाई की रात वाहन चेकिंग के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि विभूतिखंड स्थित साइबर हाइट भवन के चौथे तल पर एक फ्लैट से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी की जा रही है। सूचना के आधार पर गठित संयुक्त पुलिस टीम ने तड़के छापा मारकर पूरे रैकेट का खुलासा किया।
फ्लैट के अंदर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां विदेशी नागरिकों से ऑनलाइन बातचीत करते मिले, जिसके बाद पुलिस ने मौके से कई डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए।
चार सरगना गिरफ्तार
इस कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के सरगना सूरज त्रिपाठी, उसके सहयोगी विवेक पांडेय, राहुल त्रिपाठी और तकनीकी विशेषज्ञ आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की को गिरफ्तार किया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सूरज त्रिपाठी ने वर्ष 2012-13 में गुजरात के अहमदाबाद में एक कॉल सेंटर में काम करते हुए इस तरह की साइबर ठगी का तरीका सीखा था। बाद में उसने अपने सहयोगियों के साथ लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर शुरू कर दिया।
फर्जी Apple Support वेबसाइट बनाकर करते थे ठगी
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इंटरनेट पर फर्जी Apple Customer Support वेबसाइट तैयार कर उसका प्रचार कराया था। जब अमेरिका में कोई व्यक्ति Apple सहायता सेवा खोजता था, तो उसे गिरोह का फर्जी हेल्पलाइन नंबर दिखाई देता था।
कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को कभी Apple अधिकारी, कभी अमेरिकी सरकारी एजेंसी और कभी कोर्ट अधिकारी बताकर लोगों को डराते या झांसा देकर उनसे बड़ी रकम ठग लेते थे।
हवाला के जरिए भारत पहुंचता था पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से वसूली गई रकम अमेरिका में मौजूद गिरोह के अन्य सदस्य गिफ्ट कार्ड, सोना या नकदी के रूप में इकट्ठा करते थे। बाद में यह रकम हवाला नेटवर्क के जरिए भारत भेजी जाती थी।
देश के कई राज्यों और नेपाल से भर्ती किए गए कर्मचारी
पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर में कुल 35 कर्मचारी काम कर रहे थे। इनमें उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल के युवक-युवतियां शामिल थे।
जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं थी कि वे साइबर ठगी का हिस्सा हैं। उन्हें एक वैध विदेशी कस्टमर सपोर्ट कंपनी में नौकरी होने का भरोसा दिलाया गया था और वेतन भी नकद दिया जाता था, ताकि लेन-देन का कोई रिकॉर्ड न रहे।
कई धाराओं में केस दर्ज, जांच जारी
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और दूरसंचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही गिरोह के विदेशी नेटवर्क, हवाला कनेक्शन और अन्य सहयोगियों की तलाश तेज कर दी गई है।
नौकरी का लालच देकर खुलवाते थे बैंक खाते
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद उनके नाम से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाकर उनके:
- एटीएम कार्ड
- पासबुक
- चेकबुक
- सिम कार्ड
- इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी
अपने कब्जे में ले लेते थे।
इसके बाद इन बैंक खातों की जानकारी विदेशी साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी।
टेलीग्राम के जरिए चीनी साइबर ठगों तक भेजते थे डाटा
पुलिस के अनुसार, गिरोह बैंक खातों की जानकारी टेलीग्राम ऐप के जरिए विदेशी साइबर ठगों को भेजता था। इन खातों में ऑनलाइन साइबर अपराध से कमाई गई रकम जमा कराई जाती थी।
इसके बाद आरोपी एटीएम कार्ड और चेकबुक के माध्यम से रकम निकाल लेते थे और उसे डिजिटल करेंसी यूएसडीटी (USDT) में बदलकर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाते थे।
तीन आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए:
- वरुण कांत शर्मा (बदायूं निवासी)
- प्रेम कुमार उर्फ विमल (फर्रुखाबाद निवासी)
- एक महिला आरोपी
को गिरफ्तार किया है।
पूछताछ में गिरोह के दो अन्य सदस्यों अमित और दिनेश सिंह के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है।
40 से 45 हजार रुपये कमीशन पर करते थे काम
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्हें भी नौकरी का झांसा देकर इस नेटवर्क में शामिल किया गया था। उनका काम खातों में आने वाली रकम निकालकर गिरोह के मुख्य संचालकों तक पहुंचाना था।
इसके बदले उन्हें हर महीने करीब 40 से 45 हजार रुपये कमीशन दिया जाता था।
23 ATM कार्ड, 13 पासबुक और 9 चेकबुक बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में बैंकिंग और डिजिटल सामग्री बरामद की है।
बरामद सामान:
- 23 एटीएम कार्ड
- 13 पासबुक
- 9 चेकबुक
- 5 मोबाइल फोन
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों की डिजिटल जांच कर रही है, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेशी नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
BNS और IT Act के तहत मुकदमा दर्ज
पुलिस ने उपनिरीक्षक इंद्रपाल सिंह फौजदार की तहरीर पर हजरतगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है। साथ ही फरार आरोपियों और विदेशी साइबर नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी जारी है।





