एक मशीन का कोरियर चार्ज ₹9.95 लाख! डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज फिर विवादों में
प्रतापगढ़ के डॉ. सोनेलाल पटेल राजकीय मेडिकल कॉलेज में BERA मशीन की कोरियर सेवा पर ₹9.95 लाख का सर्विस चार्ज तय होने के आरोपों से नया विवाद खड़ा हो गया है। GeM पोर्टल के जरिए दिए गए ऑर्डर पर वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रतापगढ़।
डॉ. सोनेलाल पटेल राजकीय मेडिकल कॉलेज एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला BERA (Brainstem Evoked Response Audiometry) मशीन की आपूर्ति से जुड़ा है। आरोप है कि GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के माध्यम से मंगाई गई मशीन की कोरियर सेवा के लिए ₹9.95 लाख का सर्विस चार्ज निर्धारित किया गया, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 25 जून को GeM पोर्टल के माध्यम से BERA मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की। आरोप है कि मशीन की आपूर्ति कोरियर के जरिए होनी थी, लेकिन उसके परिवहन एवं कोरियर सेवा के लिए लगभग ₹9.95 लाख का शुल्क निर्धारित किया गया।
सामान्य तौर पर किसी एक मशीन की कोरियर लागत इससे काफी कम होती है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि तय किए जाने को लेकर विभागीय हलकों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
जानकारों का कहना है कि यदि परिवहन में विशेष सुरक्षा, बीमा या अन्य अतिरिक्त सेवाएं शामिल थीं तो उनका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अन्यथा इतनी बड़ी राशि तय किया जाना वित्तीय जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि आरोप सही हैं तो पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
पहले भी विवादों में रहा मेडिकल कॉलेज
यह पहला मौका नहीं है जब मेडिकल कॉलेज सुर्खियों में आया हो। इससे पहले भी GeM पोर्टल के जरिए एक ही दिन में 70 एयर कंडीशनर किराये पर लेने और उस पर हुए कथित भारी खर्च को लेकर कॉलेज चर्चा में रहा था। अब BERA मशीन के कथित कोरियर चार्ज का मामला सामने आने से कॉलेज की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
अब उठ रहे हैं ये सवाल
- क्या वास्तव में BERA मशीन की कोरियर सेवा के लिए ₹9.95 लाख का शुल्क तय किया गया?
- यदि हां, तो इसकी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति किस आधार पर दी गई?
- क्या GeM पोर्टल की सभी वित्तीय प्रक्रियाओं और नियमों का पालन किया गया?
- क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वित्त नियंत्रक ने क्या कहा?
मेडिकल कॉलेज के वित्त नियंत्रक (एफसी) डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान प्राचार्य ने 26 मई को कार्यभार ग्रहण किया है। उनके कार्यकाल में कई ऑर्डर दिए गए हैं, लेकिन अब तक किसी भी ऑर्डर का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि GeM पोर्टल के माध्यम से ऑर्डर की गई सामग्री की आपूर्ति हो जाती है और भुगतान लंबित रहता है, तो संबंधित आपूर्तिकर्ता न्यायालय का सहारा लेकर भुगतान प्राप्त कर सकता है। ऐसे में सरकारी धन के उपयोग और वित्तीय दायित्वों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।





