
प्रयागराज। जनसुनवाई प्रणाली पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने अपनी रैंडम चेकिंग में यह खुलासा होने के बाद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 7 तहसीलदारों सहित कुल 14 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है।
यह लापरवाही तब उजागर हुई जब जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारियों ने स्वयं आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारित हो चुकी शिकायतों के शिकायतकर्ताओं से फोन पर संपर्क कर फीडबैक लिया। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि संबंधित अधिकारियों ने उनसे संपर्क तो किया, लेकिन उनकी शिकायतों के वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया। मामलों का निस्तारण केवल कागजों पर ही दिखावटी तरीके से किया गया। जिलाधिकारी ने जन शिकायतों के इस फर्जी और गुणवत्ताहीन निस्तारण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
इस कार्रवाई की जद में विभिन्न विभागों के अधिकारी आए हैं। नोटिस पाने वालों में कोरांव, मेजा, करछना, सदर, बारा, फूलपुर और हंडिया तहसीलों के तहसीलदार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, करछना, कौंधियारा और जसरा के विकास खंड अधिकारी भी हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता तथा करछना, फूलपुर और हंडिया के बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता पर भी फर्जी निस्तारण का आरोप है।
जिलाधिकारी ने सभी 14 आरोपित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला और शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।



