कथित अपहरण मामले में प्रतापगढ़ पुलिस पर गंभीर आरोप, SP ने सीओ सिटी को सौंपी जांच
प्रतापगढ़ में कथित अपहरण मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस पर हिरासत में लिए गए आरोपियों को छोड़ने का आरोप लगाया। एसपी दीपक भूकर ने मामले की जांच सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा को सौंपी, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग तेज।

प्रतापगढ़। नगर कोतवाली में दर्ज एक युवती के कथित अपहरण मामले में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने हिरासत में लिए गए आरोपियों को चौकी से ही छोड़ दिया, जिससे युवती की बरामदगी अब तक नहीं हो सकी।
मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर से किए जाने पर उन्होंने जांच सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा को सौंप दी है।
पीड़ित परिवार के अनुसार, 9 जुलाई को अयोध्या जनपद के पूरा कलंदर थाना क्षेत्र के सुमित्रागंज निवासी प्रिंस मोदनवाल, अनीता मोदनवाल और सचिन मोदनवाल उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए।
आरोप है कि युवती घर में रखे 40 हजार रुपये नकद भी अपने साथ ले गई। घटना के संबंध में नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना भंगवा चुंगी चौकी प्रभारी अमित सिंह को सौंपी गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने हेतु पुलिस ने उनसे किराये का वाहन उपलब्ध कराने को कहा, जिस पर उन्होंने लगभग तीन हजार रुपये खर्च किए।
उनका कहना है कि 12 जुलाई को दबिश के दौरान पुलिस ने सचिन मोदनवाल और एक अन्य संदिग्ध अंकित को हिरासत में लिया और उन्हें चौकी लाया गया, लेकिन दो दिन बाद बिना किसी प्रभावी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपियों को छोड़े जाने से मामले की जांच प्रभावित हुई और युवती की बरामदगी अब तक नहीं हो सकी। शिकायत मिलने के बाद एसपी दीपक भूकर ने पूरे प्रकरण की जांच सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा को सौंप दी है। सीओ सिटी ने दोनों पक्षों को बुलाकर तथ्यों की जांच करने तथा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगाने की बात कही है।
यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि आरोप सही हैं तो हिरासत में लिए गए लोगों को किन परिस्थितियों में छोड़ा गया, क्या सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और युवती की बरामदगी में हुई देरी के लिए जिम्मेदार कौन है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।





