टेंडर में बड़ा खेल! ‘चहेते ठेकेदारों’ को फायदा पहुंचाने के आरोप, ठेकेदारों ने सीडीओ से की निष्पक्ष जांच की मांग
प्रतापगढ़ के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) में 132 विकास कार्यों के टेंडर को लेकर विवाद गहरा गया। दर्जनों ठेकेदारों ने सीडीओ से शिकायत कर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और पक्षपात के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच एवं पारदर्शी तरीके से टेंडर खोलने की मांग की है।

प्रतापगढ़। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) में निकाले गए करीब 132 विकास कार्यों के टेंडरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दर्जनों ठेकेदारों ने जिला मुख्य विकास अधिकारी को शिकायती पत्र देकर अधिशासी अभियंता पर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ठेकेदारों का दावा है कि नियमों को दरकिनार कर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
शिकायत के अनुसार सभी ठेकेदारों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत टेंडर फॉर्म खरीदे और निविदाएं जमा कीं, लेकिन आरोप है कि बीओक्यू (BOQ) केवल चहेते ठेकेदारों को उपलब्ध कराई गई, जबकि अन्य ठेकेदारों को इससे वंचित रखा गया। इतना ही नहीं, विरोधी ठेकेदारों के टेंडर निरस्त करने की तैयारी भी की जा रही है ताकि पसंदीदा फर्मों को काम मिल सके।
ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि पहले से जमा निविदाओं को नजरअंदाज कर नए दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे विभाग को राजस्व हानि होने की आशंका है। शिकायत पत्र पर कई ठेकेदारों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।
ठेकेदारों ने सीडीओ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पारदर्शी तरीके से टेंडर खोलने की मांग की है। अब इस शिकायत के बाद ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। यदि आरोप सही पाए गए तो यह मामला विभागीय भ्रष्टाचार और पक्षपात का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है। इस बाबत अधिशासी अभियंता का पक्ष लेने का प्रयास किया गया किंतु उनका फोन नॉट रीच बता रहा था।
अधिशासी अभियंता विपुल चंद्रा ने आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए बताया कि विधिक प्रक्रिया के साथ ही टेंडर कराया गया है, लेकिन लोग फर्जी शिकायत कर विभाग और सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे है।





