“युवाओं की आवाज़ को दबाने नहीं, सुनने की जरूरत है” — समाजसेवी बृजेश तिवारी सेवादार
प्रतापगढ़ के समाजसेवी बृजेश तिवारी सेवादार ने विशेष बातचीत में कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय हैं। सरकार से पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

लालगंज, प्रतापगढ़। देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और युवाओं के बढ़ते आक्रोश को लेकर जिले के समाजसेवी बृजेश तिवारी ‘सेवादार’ ने विशेष बातचीत में अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग होता है। यदि वही अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगे तो यह सरकार और व्यवस्था, दोनों के लिए गंभीर चिंतन का विषय है।
बृजेश तिवारी सेवादार ने कहा कि आज लाखों युवा वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। यह केवल एक परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के मनोबल और भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ देखना चाहिए। युवाओं की आवाज़ को विरोध मानने के बजाय उनकी पीड़ा को समझना अधिक आवश्यक है। लोकतंत्र में संवाद ही हर समस्या का सबसे प्रभावी समाधान होता है।
समाजसेवी बृजेश तिवारी ने कहा कि आज का विद्यार्थी और युवा देश विरोधी नहीं है। वह केवल एक पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था चाहता है, जहां उसकी मेहनत का उचित सम्मान हो। यदि समय रहते युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो उनमें बढ़ती निराशा और आक्रोश समाज के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई हो, दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा मिले तथा भर्ती और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। इससे युवाओं का विश्वास मजबूत होगा और व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा भी कायम रहेगा।
बृजेश तिवारी सेवादार ने अंत में कहा कि सरकार और युवाओं के बीच विश्वास का रिश्ता बना रहना चाहिए। संवाद, संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्रवाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।





