
प्रयागराज।
हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में आज डाॅ उदयनारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘भाषा विज्ञान वर्तमान स्वरूप चुनौतियां और भविष्य’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा एवं डाॅ उदयनारायण तिवारी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि डाॅ उदयनारायण तिवारी का भाषा-विज्ञान के क्षेत्र मे विशेष योगदान था उनकी स्मृति में हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को ‘डाॅ उदयनारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन करती है।
सगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रामकिशोर शर्मा, पूर्व आचार्य, इविवि ने कहा कि भाषा विज्ञान अनेक अन्य अनुशासनों की तुलना में नवीन है इसे एक स्वतंत्र विषय की संज्ञा 19वीं शताब्दी में मिली पहले भाषा संबंधी जो कार्य किए जाते थे उन्हें व्याकरण कहते थे यह तभी भारत में अति प्राचीन काल से शिक्षा, कल्प, निरुक्ती, निघंटु विज्ञान, व्युत्पत्ति शास्त्र, कोश विज्ञान, की नई पड़ गई थी।
पणिनी ने संस्कृत भाषा का इस प्रकार सूत्रबद्ध व्याकरण अष्टााध्यायी के नाम से प्रस्तुत किया था इसकी वैज्ञानिकता से जब पाश्चात्य विद्वान अवगत हुए तो उनके प्रयास से आधुनिक भाषा विज्ञान का श्रीगणेश हुआ। संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता डाॅ. रविनंदन सिंह, सम्पादक ‘सरस्वती’ पत्रिका ने ‘भाषा विज्ञान वर्तमान स्वरूप चुनौतियां और भविष्य’ पर प्रकाश पर डाला।
कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अनूप कुमार ने किया। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी रतन पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासा’, डाॅ. बीरेन्द्र कुमार तिवारी, सुनील दानिश, प्रवीण माधव, डाॅ. अनिल कुमार सिंह, डाॅ. पारूल सिंह, शरद श्रीवास्तव, एम. एस. खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



