सीतापुर में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा पर ब्रेक: शुरू होते ही बंद हुईं बसें, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
सीतापुर-तंबौर मार्ग पर मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद बंद कर दी गई। परिवहन निगम ने कम सवारियों के कारण घाटे का हवाला दिया, जबकि स्थानीय लोगों ने बिना सर्वे योजना लागू करने पर सवाल उठाए।

सीतापुर:
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत सीतापुर-तंबौर मार्ग पर शुरू की गई बसों का संचालन शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद बंद कर दिया गया है। परिवहन निगम का कहना है कि पर्याप्त सवारियां नहीं मिलने के कारण बसों का संचालन घाटे का सौदा साबित हो रहा था। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सर्वे और योजना के बसें शुरू की गईं, जिसका खामियाजा अब यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीण बस सेवा बंद होने के बाद एक बार फिर तंबौर और आसपास के क्षेत्र के लोगों को निजी बसों और ई-रिक्शा पर निर्भर होना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी बस सेवा शुरू होने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, मरीजों और आम यात्रियों को काफी राहत मिली थी, लेकिन अचानक सेवा बंद होने से उनकी परेशानी फिर बढ़ गई है।
फिलहाल तंबौर से वाया महमूदाबाद लखनऊ जाने वाली दो बसें और वाया लहरपुर सीतापुर जाने वाली तीन बसें पहले की तरह संचालित हो रही हैं। क्षेत्र के सोनू सिंह, सत्यप्रकाश वर्मा, पद्माकर दीक्षित, राम सिंह और आदिल खान समेत कई लोगों ने मांग की है कि यात्रियों की संख्या को देखते हुए कम से कम हर तीन घंटे पर एक नियमित बस चलाई जाए। उनका कहना है कि इससे लोगों को सुविधा मिलेगी और परिवहन निगम को भी नुकसान नहीं होगा।
बिना सर्वे शुरू हुई सेवा, फिर घाटे का हवाला
स्थानीय लोगों के अनुसार ग्रामीण बस सेवा शुरू करने से पहले परिवहन निगम ने न तो यात्रियों की वास्तविक संख्या का सर्वे किया और न ही बस स्टॉप, समय और मांग का सही आकलन किया। इसके बावजूद सीतापुर डिपो से करीब छह अतिरिक्त फेरे शुरू कर दिए गए, जबकि इसी मार्ग पर पहले से निजी बसें और बड़ी संख्या में ई-रिक्शा संचालित थे।
यात्रियों के बंटवारे के कारण सरकारी बसों में अपेक्षित संख्या में सवारियां नहीं मिलीं और कुछ ही दिनों में सेवा बंद करनी पड़ी। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि योजना लागू करने से पहले व्यवहारिक सर्वे किया गया होता, तो क्या यह स्थिति उत्पन्न होती? स्थानीय लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए फैसले का असर सीधे आम यात्रियों पर पड़ा है।





