नशा मुक्त भारत अभियान में जुटा राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, कुलपति बोले, युवाओं को जोड़ेंगे राष्ट्रीय मिशन से
प्रयागराज के उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत संगोष्ठी आयोजित हुई। प्रो. पी. के. साहू ने सामाजिक शुचिता के लिए नशे पर नियंत्रण जरूरी बताया, जबकि कुलपति प्रो. सत्यकाम ने विश्वविद्यालय की अग्रणी भूमिका का संकल्प दोहराया।

प्रयागराज।
प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ के शुभारंभ के साथ ही उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (UPRTOU), प्रयागराज ने भी नशा मुक्त भारत अभियान को गति देने का संकल्प लिया। विश्वविद्यालय मुख्यालय समेत इसके 12 क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रधानमंत्री के संदेश का लाइव प्रसारण देखा गया और नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय में चल रहे नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा के अंतर्गत ‘नशा और नशा मुक्ति’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
‘सामाजिक शुचिता के लिए नशे पर नियंत्रण जरूरी’
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पी. के. साहू ने कहा कि नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौती भी है। उन्होंने कहा कि भारत के कई हिस्सों में कुछ नशीले पेय और खाद्य पदार्थ परंपराओं का हिस्सा रहे हैं, इसलिए इनके प्रति लोगों को जागरूक करना अधिक प्रभावी होगा।
उन्होंने महात्मा गांधी के मद्य निषेध आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वस्थ और नैतिक समाज के निर्माण के लिए नशे पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान में अग्रणी भूमिका निभाएगा विश्वविद्यालय
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय और अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी निदेशकों, शिक्षकों, शोधार्थियों और अधिकारियों से अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कुलपति ने प्रो. साहू द्वारा सुझाए गए प्रोजेक्ट पर तत्काल कार्य शुरू करने के निर्देश भी दिए।
12 क्षेत्रीय केंद्रों तक पहुंचा अभियान
विश्वविद्यालय के 12 क्षेत्रीय केंद्रों में भी प्रधानमंत्री के संदेश का प्रसारण किया गया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. पी. के. स्टालिन ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संचालन डॉ. संजय कुमार सिंह ने किया। अंत में डॉ. बाल गोविंद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।





