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महर्षि दधीचि कुंड में फिर मची ‘मौत की बारिश‘, दूसरे दिन भी हजारों मछलियां मरीं, बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल

सीतापुर के मिश्रिख स्थित महर्षि दधीचि कुंड में लगातार दूसरे दिन हजारों मछलियां मृत मिलीं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने बदहाल व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान और जांच की मांग की।

सीतापुर। आस्था और इतिहास के प्रतीक महर्षि दधीचि कुंड मिश्रिख में लगातार दूसरे दिन भी हजारों मछलियों की मौत ने तीर्थ की बदहाल व्यवस्था को उजागर कर दिया है। शुक्रवार सुबह कुंड में बड़ी संख्या में मृत मछलियां तैरती मिलीं, जिन्हें कर्मचारियों ने डाला में भरकर बाहर निकाला। हर साल बरसात के साथ दोहराई जा रही यह त्रासदी अब प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर महर्षि दधीचि ने देवताओं के कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान किया था, जिनसे इंद्र का वज्र बना और असुर वृत्रासुर का वध हुआ। देश-विदेश से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक तीर्थ के दर्शन करने आते हैं, लेकिन उसी कुंड में हर वर्ष हजारों मछलियों का दम घुटना चिंता का विषय बन गया है। तीर्थ के पुजारी राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि पहली बारिश के बाद हर साल मछलियां मरती हैं, फिर भी स्थायी समाधान नहीं किया जाता। स्वामी विमलानंद सरस्वती ने जिलाधिकारी से वार्ता कर एरेशन मशीनें तत्काल चालू कराने की मांग की। नगर निवासी राजीव मिश्रा ‘मिंटू‘ और स्थानीय निवासी सोमनाथ का कहना है कि कुंड की फिल्टर मशीनें महीनों से बंद हैं, दवा का नियमित प्रयोग नहीं हो रहा और ऑक्सीजन की कमी से यह स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने तीर्थ के विकास कार्यों पर हुए खर्च की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उपजिलाधिकारी अभिनव यादव ने बताया कि पानी में चूना और पोटाश डलवाया जा रहा है तथा खराब मोटर को मरम्मत के लिए भेजा गया है। हालांकि सवाल यह है कि यदि समस्या वर्षों से चली आ रही है तो अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि करोड़ों की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी होगा, जब दधीचि कुंड की पवित्रता और जीवंतता दोनों सुरक्षित रह सकें।

Shivram Giri

शिवराम गिरि वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 17 वर्षों का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला और भारत समाचार जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता के हर माध्यम पर उनकी मज़बूत पकड़ उन्हें मीडिया जगत में एक विश्वसनीय आवाज बनाती है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी पहचान है।

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