प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज में 30 लाख ग्लव्स की खरीद पर सवाल, वित्तीय स्वीकृति को लेकर उठे विवाद
प्रतापगढ़ के डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में 30 लाख सर्जिकल ग्लव्स की खरीद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। GeM दस्तावेज, वित्तीय स्वीकृति और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जांच की मांग तेज हो गई है।

प्रतापगढ़।
डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में खरीद प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला 30 हजार पैकेट सर्जिकल ग्लव्स की खरीद से जुड़ा है। GeM पर जारी अनुबंध के मुताबिक एक पैकेट में 100 ग्लव्स हैं। इस तरह कॉलेज ने करीब 30 लाख ग्लव्स खरीदने का ऑर्डर दिया है। इसकी कुल कीमत 8.70 लाख रुपये बताई गई है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि मेडिकल कॉलेज के वित्त नियंत्रक (FC) के मुताबिक उन्हें इस खरीद की जानकारी ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में चिकित्सा सामग्री की खरीद किस स्तर पर और किसकी जानकारी में की गई?
GeM के दस्तावेज के अनुसार अनुबंध 4 जुलाई 2026 को जारी हुआ। इसमें खरीद की वित्तीय स्वीकृति के विवरण में FI Concurrence—No दर्ज है, जबकि प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रधानाचार्य का उल्लेख है। यानी लाखों रुपये की खरीद में वित्तीय सहमति का सवाल सीधे सामने खड़ा है।
30 लाख ग्लव्स की जरूरत कितनी, खपत का हिसाब कौन देगा?
एक साथ 30 लाख ग्लव्स की खरीद ने कॉलेज की वास्तविक जरूरत और खपत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेज में ग्लव्स की 12 महीने की शेल्फ लाइफ दर्ज है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि कॉलेज में प्रतिमाह इनकी वास्तविक खपत कितनी है और पहले से कितना स्टॉक मौजूद था।
यदि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री की तत्काल आवश्यकता थी तो उसका आधार क्या था? और यदि आवश्यकता नहीं थी तो सरकारी धन खर्च कर भारी मात्रा में स्टॉक जुटाने का औचित्य क्या है?
एफसी के संज्ञान में नहीं तो किसकी अनुमति से हुई खरीद?
मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि वित्त नियंत्रक खरीद से अनभिज्ञता जता रहे हैं। ऐसे में अब सवाल केवल ग्लव्स की कीमत का नहीं, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता का है। क्या कॉलेज प्रशासन ने वित्तीय प्रक्रिया को दरकिनार कर खरीद की? क्या खरीद से पहले स्टॉक और खपत का आकलन किया गया? क्या सक्षम स्तर से अनुमति ली गई?
इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज में लगातार सामने आ रहे खरीद संबंधी मामलों के बीच यह नया मामला भी जांच की मांग कर रहा है। यदि वित्त नियंत्रक की सहमति अथवा जानकारी के बिना लाखों रुपये की खरीद हुई है तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं कॉलेज प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि 30 लाख ग्लव्स की खरीद की जरूरत क्यों पड़ी और सरकारी धन के खर्च का आधार क्या था।





