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वकीलों के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्र व प्रमाणपत्र भी निकले फर्जी

प्रयागराज में फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर वकालत करने के मामले में अब तक 99 अधिवक्ताओं पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। जांच में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र भी संदिग्ध मिले हैं।

प्रयागराज।

फर्जी शैक्षिक डिग्री के आधार पर वकालत करने के आरोप में दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर 99 हो गई है। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव की ओर से सिविल लाइंस थाने में एक और एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामला सामने आने के बाद अधिवक्ताओं के शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर जांच और तेज हो गई है।

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मो. कफील बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य मामले में पारित आदेश में बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकृत उन अधिवक्ताओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था, जिनकी शैक्षिक डिग्रियां बार कौंसिल ऑफ इंडिया के सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) नियम, 2015 के तहत सत्यापन में फर्जी पाई गई हैं।

जांच के दौरान अब एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। कुछ अधिवक्ताओं के दस्तावेजों में सिर्फ स्नातक स्तर की डिग्री ही संदिग्ध नहीं मिली, बल्कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्र व प्रमाणपत्र भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

बार कौंसिल में पंजीकरण और सीओपी यानी सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस के लिए लगाए गए इन शैक्षिक दस्तावेजों का संबंधित बोर्ड और संस्थानों से सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान कुछ दस्तावेजों का रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो सका। इसके बाद दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

फर्जी दस्तावेजों का स्रोत तलाश रही बार कौंसिल

अब बार कौंसिल यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित अधिवक्ताओं ने अलग-अलग स्तर की कथित फर्जी शैक्षिक डिग्रियां, अंकपत्र और प्रमाणपत्र कहां से हासिल किए। जांच में यदि कई मामलों में दस्तावेजों का एक जैसा स्रोत सामने आता है तो किसी संगठित गिरोह की भूमिका की भी जांच हो सकती है।

फिलहाल पुलिस और संबंधित संस्थाएं दस्तावेजों के सत्यापन तथा मुकदमों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने या उपलब्ध कराने में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत करने के आरोपों से जुड़े मामलों की संख्या 99 तक पहुंचने के बाद न्यायिक और कानूनी क्षेत्र में भी मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब जांच एजेंसियों की नजर कथित फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क और उनके स्रोत तक पहुंचने पर है।

Sunil Somvanshi

सुनील सोमवंशी वरिष्ठ पत्रकार है,उन्हें प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मे लंबे समय का अनुभव प्राप्त है, उन्होंने राजस्थान पत्रिका, न्यूज नेशन, प्राइम न्यूज, भारत एक्सप्रेस और बंसल न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में लगातार अपनी सेवाएं दी है, वर्तमान में प्रयागराज में दैनिक पाड के संवाददाता के रूप में कार्यरत है।

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