पुराने अभिलेख प्रतापगढ़ आएं और नान-जेड भूमि का पंजीकरण शुरू हो, तो जमीन के अधिकांश विवादों पर लगेगी लगाम
प्रतापगढ़ सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य ने 1960 से पूर्व के भूमि अभिलेख प्रतापगढ़ स्थानांतरित करने और नान-जेड भूमि का पंजीकरण शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे भूमि विवाद कम होंगे और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

प्रतापगढ़। जनपद में सबसे अधिक विवाद यदि किसी विषय को लेकर होते हैं तो वह है जमीन और उसके स्वामित्व का विवाद। वर्षों पुराने अभिलेखों के अभाव, पंजीकरण संबंधी तकनीकी अड़चनों और अभिलेखों तक समय से पहुंच न होने के कारण अनेक मामले न्यायालयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य ने स्टांप एवं पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक/आयुक्त को दो अलग-अलग पत्र भेजकर ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जिनका समाधान होने पर जिले में भूमि संबंधी विवादों में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
विधायक ने अपने पहले पत्र में मांग की है कि वर्ष 1960 से पूर्व प्रतापगढ़ में हुए भूमि लेखपत्रों के पंजीकरण एवं अभिलेख, जो वर्तमान में रायबरेली के अभिलेखागार में सुरक्षित रखे गए हैं, उन्हें प्रतापगढ़ मुख्यालय स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि अधिवक्ताओं, व्यापारियों और आम नागरिकों ने उन्हें अवगत कराया है कि पुराने अभिलेखों के निरीक्षण अथवा प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए करीब 80 किलोमीटर दूर रायबरेली जाना पड़ता है।
इससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती है, बल्कि कई बार आवश्यक अभिलेख समय पर उपलब्ध न होने के कारण मुकदमों के निस्तारण में भी विलंब होता है।
जमीन के पुराने दस्तावेज किसी भी स्वामित्व विवाद में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जाते हैं। यदि ये अभिलेख प्रतापगढ़ में उपलब्ध हो जाएं तो वादकारियों, अधिवक्ताओं और राजस्व अधिकारियों को तत्काल आवश्यक दस्तावेज मिल सकेंगे। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और वर्षों से लंबित विवादों के निस्तारण में भी तेजी आएगी।
विधायक ने दूसरे पत्र में नान-जेड (Non-ZA) भूमि के पंजीकरण का मामला उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शासन के 15 जुलाई 2013 के आदेश में ऐसी भूमि के पंजीकरण पर किसी प्रकार की न्यायालयीय रोक नहीं है, फिर भी प्रतापगढ़ में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा पंजीकरण नहीं किया जा रहा है।
विधायक ने इसे शासनादेश की भावना के विपरीत बताते हुए तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि नान-जेड भूमि का पंजीकरण बंद रहने से दोहरा नुकसान हो रहा है। एक ओर सरकार को पंजीकरण शुल्क के रूप में मिलने वाला राजस्व प्रभावित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक अपनी खरीदी-बिक्री और अन्य आवश्यक कार्य नहीं करा पा रहे हैं।
इससे लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
प्रतापगढ़ में बड़ी संख्या में भूमि संबंधी मुकदमे न्यायालयों और राजस्व न्यायालयों में लंबित हैं। इनमें से अनेक मामलों की जड़ पुराने अभिलेखों की अनुपलब्धता, स्वामित्व संबंधी भ्रम और पंजीकरण की बाधाएं हैं।
ऐसे में माना जा रहा है कि यदि विधायक की मांगों पर शासन गंभीरता से अमल करता है और 1960 से पूर्व के अभिलेख प्रतापगढ़ स्थानांतरित हो जाते हैं तथा नान-जेड भूमि का पंजीकरण पुनः शुरू हो जाता है, तो जमीन संबंधी विवादों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इससे न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी बल्कि न्यायालयों और राजस्व विभाग पर भी मुकदमों का बोझ कम होगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य लंबे समय से जनता के बीच सक्रिय रहने वाले जनप्रतिनिधि हैं और स्थानीय समस्याओं की गहरी समझ रखते हैं।
भूमि विवादों की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सीधे शासन स्तर पर पहल की है। अब निगाहें स्टांप एवं पंजीयन विभाग पर टिकी हैं कि वह इन दोनों जनहित के मुद्दों पर कितना शीघ्र निर्णय लेता है।





