
प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई से सभी लेखपालों को ग्राम सचिवालय में नियमित रूप से बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण करने का स्पष्ट आदेश जारी किया था। उद्देश्य था कि किसानों और ग्रामीणों को आय, जाति, निवास, खतौनी, सीमांकन और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए तहसीलों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन प्रतापगढ़ में शासन का यह आदेश धरातल पर पूरी तरह बेअसर दिखाई दे रहा है।
सदर विकासखंड क्षेत्र में जब इस आदेश की पड़ताल की गई तो तस्वीर चौंकाने वाली सामने आई। 90 प्रतिशत से अधिक ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने दावा किया कि लेखपाल आज भी अपने पुराने ढर्रे पर काम कर रहे हैं और ग्राम सचिवालय में नियमित रूप से नहीं बैठ रहे हैं। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी लेखपाल की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
पूरे भैया, जैतीपुर, सराय महिमा, रामनगर सहित कई गांवों के प्रधानों और ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सचिवालयों में लेखपालों की उपस्थिति नाम मात्र की है। कई सचिवालयों में ग्रामीण घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन लेखपाल नहीं पहुंचते। न तो निर्धारित समय का पालन हो रहा है और न ही लोगों की शिकायतों का मौके पर समाधान। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार लगातार गांव स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने और लोगों को उनके गांव में ही सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है, लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही शासन के आदेशों का पालन नहीं करते तो पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि शासन के आदेशों का पालन कराने की प्रभावी व्यवस्था नहीं है, तो ऐसे आदेश जारी करने का औचित्य क्या है? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा लेखपालों की उपस्थिति की कोई निगरानी की जा रही है? यदि निगरानी हो रही है तो अनुपस्थित रहने वाले लेखपालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई? ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम सचिवालयों में लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। साथ ही, जो लेखपाल शासन के आदेश की लगातार अनदेखी कर रहे हैं, उनके विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि ग्राम सचिवालय वास्तव में ग्रामीणों के लिए सुविधाओं का केंद्र बन सकें, न कि केवल सरकारी फाइलों का हिस्सा।





