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डॉ सोनेलाल मेडिकल कॉलेज में AC किराया घोटाले की चर्चा!

प्रतापगढ़ के डॉ. सोनेलाल पटेल राजकीय मेडिकल कॉलेज में 70 एसी किराए पर लेने के अनुबंध पर वित्तीय अनियमितता के आरोप। ₹70 लाख के भुगतान पर वित्त नियंत्रक ने रोक लगाई, प्रमुख सचिव से मांगा मार्गदर्शन।

प्रतापगढ़। डॉ. सोनेलाल पटेल राजकीय मेडिकल कॉलेज एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला मेडिकल कॉलेज में एयर कंडीशनर (एसी) किराए पर लेने के अनुबंध का है, जिसमें प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।

मामले की जानकारी विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ आम लोगों तक पहुंचने के बाद यह पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य द्वारा 15 जुलाई को सरकारी खरीद प्रणाली GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) के माध्यम से एक ही दिन में क्रमवार 70 वॉल माउंटेड एयर कंडीशनर किराए पर लेने का अनुबंध किया गया।

आरोप है कि प्रत्येक एसी का एक दिन का किराया ₹1 लाख निर्धारित किया गया। इस प्रकार 70 एसी का एक दिन का कुल किराया ₹70 लाख बनता है।

सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े वित्तीय दायित्व वाले अनुबंध से पहले क्या वित्त नियंत्रक (एफसी) की अनिवार्य स्वीकृति ली गई थी? सूत्रों के अनुसार इस प्रक्रिया में वित्त नियंत्रक की अनुमति प्राप्त नहीं की गई। जब अनुबंध के आधार पर भुगतान की फाइल वित्त नियंत्रक के पास पहुंची तो उन्होंने भुगतान पर तत्काल आपत्ति दर्ज कर दी।

बताया जा रहा है कि वित्त नियंत्रक ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण पर मार्गदर्शन मांगा है। जब तक शासन से स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक भुगतान पर रोक बनी हुई है।

मामले को लेकर विभागीय गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। अधिकारी और कर्मचारी भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर एक दिन के लिए प्रति एसी ₹1 लाख किराया निर्धारित कैसे किया गया और इतनी बड़ी वित्तीय देनदारी वाला अनुबंध किस आधार पर किया गया।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के उपयोग और वित्तीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उधर, इस मामले की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद आमजन भी हैरान हैं। लोगों का कहना है कि जिस धन से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाना चाहिए, यदि उसी में इस प्रकार की अनियमितताएं होंगी तो सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब सभी की निगाहें प्रमुख सचिव के निर्णय पर टिकी हैं। यदि जांच में वित्तीय नियमों के उल्लंघन या प्रक्रिया में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने के साथ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।

Girijesh Tiwari

गिरिजेश तिवारी वरिष्ठ एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में लंबे समय का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा और यूनाइटेड भारत जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में प्रतापगढ़ से दैनिक पॉड के संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।

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