उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन बना कमाई का नया जरिया, बायोफ्लॉक तकनीक से किसान की सालाना 6 लाख रुपये की शुद्ध आय
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मत्स्य पालन को बढ़ावा मिल रहा है। प्रतापगढ़ के किसान रणंजय सिंह ने बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर सालाना 18 लाख रुपये का कारोबार और करीब 6 लाख रुपये की शुद्ध आय हासिल की।

उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन से बदल रही ग्रामीणों की किस्मत, बायोफ्लॉक तकनीक से किसान की लाखों की कमाई
मत्स्य पालन बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का नया मॉडल
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मत्स्य पालन को तेजी से बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिए आधुनिक तकनीकों को अपनाकर प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
प्रतापगढ़ के रणंजय सिंह बने सफलता की मिसाल
प्रतापगढ़ जिले के विकासखंड सण्डवा चंद्रिका के कटका मानापुर गांव निवासी रणंजय सिंह ने पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन शुरू किया। विभागीय मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की मदद से उन्होंने अपनी निजी भूमि पर आधुनिक मत्स्य पालन इकाई स्थापित की, जो आज बेहतर आय का स्रोत बन चुकी है।
बायोफ्लॉक तकनीक से 18 लाख रुपये का कारोबार
रणंजय सिंह ने अपनी इकाई में पंगेशियस प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया। वैज्ञानिक जल प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों की मदद से उनकी इकाई से हर वर्ष लगभग 1.40 टन मछली उत्पादन हो रहा है।
- वार्षिक कारोबार: करीब 18 लाख रुपये
- कुल वार्षिक लागत: लगभग 7 लाख रुपये
- शुद्ध वार्षिक आय: करीब 6 लाख रुपये
- स्थानीय रोजगार: 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
यह मॉडल कम भूमि और कम पानी में अधिक उत्पादन का सफल उदाहरण बनकर सामने आया है।
आधुनिक तकनीकों पर सरकार का विशेष फोकस
प्रदेश सरकार पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ-साथ बायोफ्लॉक सिस्टम, रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और केज कल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। इन तकनीकों से कम संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे युवा तेजी से इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
महिलाओं और मछुआरा समुदाय को भी मिल रहा लाभ
सरकार स्वयं सहायता समूहों को मत्स्य बीज उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जोड़ रही है। वहीं ग्राम सभा के तालाबों के पट्टों के आवंटन में स्थानीय मछुआरा समुदाय और भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता देकर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
बीमा, KCC और मार्केटिंग की बेहतर सुविधा
मत्स्य पालकों को बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित आहार और प्रशिक्षण की सुविधा दी जा रही है। साथ ही कोल्ड चेन, रेफ्रिजरेटेड वाहन और आधुनिक मत्स्य बाजार विकसित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है।
उत्तर प्रदेश बन रहा मत्स्य उत्पादन का मजबूत केंद्र
सरकार का दावा है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश आज अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। प्रतापगढ़ के रणंजय सिंह की सफलता यह दिखाती है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और बेहतर आय का नया रास्ता तैयार किया जा सकता है।





