
लखनऊ।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर जनसमस्याओं की अनदेखी, भ्रष्टाचार और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के शब्दकोश में ‘जवाबदेही’ शब्द ही नहीं है। भाजपा जनतंत्र को धनतंत्र मानकर दोहन और दमन की राजनीति कर रही है।
संसद परिसर में बुधवार को मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में सड़क निर्माण की मांग को लेकर स्कूली बच्चों के जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब वर्षों तक सड़क निर्माण की मांग पर सुनवाई नहीं हुई तो बच्चों को प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
‘जनता खुद सत्ता के पास पहुंच जाएगी’
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर अहंकारी शासन और प्रशासन जनता की समस्याओं को सुनने के लिए उसके पास नहीं पहुंचेगा तो जनता खुद उनके पास पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा ऊपर से नीचे तक जिस ‘एकतंत्र’ का निर्माण करना चाहती है, वह अब नहीं चल सकता।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और लोक सेवकों को समझना होगा कि लोकतंत्र नीचे से ऊपर की ओर चलता है। समाजवादी विचारधारा का मूल सिद्धांत है कि ‘समाज के लिए सत्ता है।’ शासन और प्रशासन को भी इसी सोच के साथ काम करना चाहिए।
‘जनकल्याण नहीं तो सरकार के अस्तित्व का औचित्य नहीं’
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सत्ता के लिए समाज का इस्तेमाल करती है, जबकि समाजवादी विचारधारा सत्ता के सदुपयोग की बात करती है। सत्ता का उद्देश्य समाज का उत्थान और जनकल्याण होना चाहिए। अगर जनकल्याण नहीं है तो सरकार के अस्तित्व का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
जेवर एयरपोर्ट और एक्सप्रेस-वे को लेकर सवाल
अखिलेश यादव ने भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां ‘महाभ्रष्टाचार’ है। उन्होंने सरकारी कार्यों में कथित कमीशनखोरी और बजट के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
उन्होंने जेवर एयरपोर्ट में जलभराव, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर गड्ढों, जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकियों के गिरने और अयोध्या में राममंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने मामले सामने आने के बावजूद जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही है।
FCRA विधेयक पर भी साधा निशाना
FCRA विधेयक के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा विपक्ष इसके खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से लाया जाने वाला हर विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ होता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान और जनकल्याण होना चाहिए, न कि सत्ता को मजबूत करना।





