
अयोध्या।
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। कौटिल्य प्रशासनिक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में चित्रकला, देशभक्ति गीत, एकल गायन, समूह गायन, वाद्य यंत्र और नाट्य प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कला और संस्कृति से विद्यार्थियों का होता है सर्वांगीण विकास
कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की रीढ़ हैं। कला, संगीत और रंगमंच न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखते हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, अभिव्यक्ति और नेतृत्व क्षमता का भी विकास करते हैं।
उन्होंने कहा कि 31वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर छात्र-छात्राओं ने जिस तरह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, वह सराहनीय है। विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए हर संभव मंच और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
इन विद्यार्थियों ने हासिल किया प्रथम स्थान
आयोजित प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने विभिन्न विधाओं में हिस्सा लिया। वाद्य यंत्र प्रतियोगिता में दुर्गेश सिंह ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं एकल गायन में अन्नपूर्णा प्रथम रहीं।
समूह गायन प्रतियोगिता में स्वाती मौर्य और अंजली यादव की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को कुलपति ने पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।
चार शिक्षकों ने निभाई निर्णायक की भूमिका
सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. वंदिता पांडेय, डॉ. महेंद्र पाल सिंह और डॉ. कविता पाठक ने निभाई।
कार्यक्रम का आयोजन संयोजक प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. नीलम पाठक, डॉ. शांभवी शुक्ला, प्रवीण मिश्रा और निहारिका श्रीवास्तव की देखरेख में किया गया।
कार्यक्रम में कुलसचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेन्दु शुक्ल, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. शांभवी शुक्ला, प्रवीण मिश्रा और वेद उपाध्याय समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अधिकारी मौजूद रहे।





