बच्चों को अंग्रेजी, गणित और हिंदी में दक्ष बनाने के लिए शिक्षकों को दिए प्रशिक्षण, पांच दिवसीय कार्यक्रम शुरू
खागा के बीआरसी भवन में बच्चों को हिंदी, गणित और अंग्रेजी में दक्ष बनाने के लिए पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण शुरू हुआ। शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण तकनीक और गतिविधियां बताई गईं।

फतेहपुर।
कस्बे के बीआरसी भवन सभागार में शनिवार को बच्चों को अंग्रेजी, गणित और हिंदी भाषा में दक्ष बनाने के उद्देश्य से पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण में शिक्षकों को विषयवार शिक्षण की प्रभावी तकनीकों के साथ बच्चों की समझ विकसित करने और उनकी बुनियादी पकड़ मजबूत करने के तरीके बताए गए।
बच्चों में विषयों के प्रति रुचि बढ़ाने पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि बच्चों में विषयों के प्रति रुचि पैदा करने के साथ उनकी बुनियादी समझ मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए कक्षा में बच्चों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने और उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनाने पर जोर दिया गया।
एनआरपी ने शिक्षकों को अंग्रेजी, गणित और हिंदी के शिक्षण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। शिक्षकों को सरल और रोचक तरीके से पाठ पढ़ाने, बच्चों की सहभागिता बढ़ाने तथा उनकी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने के उपाय बताए गए।
बच्चों के स्तर के अनुसार अपनाएं शिक्षण पद्धति
प्रशिक्षण में शिक्षकों को बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनाने की सलाह दी गई। साथ ही कक्षा में ऐसी गतिविधियों को शामिल करने पर जोर दिया गया, जिससे बच्चे विषय को केवल याद करने के बजाय उसे समझ सकें और व्यवहार में इस्तेमाल कर सकें।
तीनों विषयों में मजबूत हो बुनियादी पकड़
एआरपी दीपक कुमार ने कहा कि विभाग की ओर से बच्चों को अंग्रेजी, गणित और हिंदी जैसे प्रमुख विषयों में दक्ष बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन विषयों में बच्चों की बुनियादी पकड़ मजबूत होने से आगे की पढ़ाई में उन्हें काफी मदद मिलेगी।
उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण के दौरान बताई गई गतिविधियों और तकनीकों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की।
समय-समय पर होंगे शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम
खंड शिक्षा अधिकारी रत्नामणि मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य शिक्षण कार्य को अधिक प्रभावी बनाना और बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार करना है।
उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण में मिली जानकारी का विद्यालयों में प्रयोग करने और प्रत्येक बच्चे की शैक्षिक प्रगति पर विशेष ध्यान देने को कहा।





