
प्रतापगढ़। शासन के निर्देश पर गांवों में निराश्रित एवं घुमंतू कुत्तों की गणना कर उनके प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा फरवरी माह में सभी विकास खंडों से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि उक्त रिपोर्ट अब जुलाई माह के अंतिम दिन तत्काल प्रभाव से मांगी जा रही है।
बताया जा रहा है कि जिला पंचायत राज विभाग ने 31 जुलाई को ग्राम प्रधानों और संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब जिलाधिकारी ने फरवरी में ही समयबद्ध कार्रवाई के आदेश दिए थे, तो पांच माह तक विभाग क्यों निष्क्रिय बना रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित और घुमंतू कुत्तों की बढ़ती संख्या लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। कई स्थानों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद समय पर गणना और प्रबंधन की कार्रवाई न होना विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
अब पांच महीने बाद आनन-फानन में रिपोर्ट तलब किए जाने को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि जिलाधिकारी के निर्देशों का समय पर पालन किया जाता, तो निराश्रित कुत्तों के प्रबंधन की दिशा में काफी पहले प्रभावी कदम उठाए जा सकते थे।
हालांकि, जिला पंचायत राज विभाग की ओर से रिपोर्ट में हुई देरी के कारणों पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब यह देखना होगा कि इस मामले में जिलाधिकारी विभागीय लापरवाही का संज्ञान लेते हैं या नहीं।





