
चित्रकूट।
डीएम पुलकित गर्ग की अध्यक्षता एवं एसपी अरुण कुमार सिंह की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट
सभागार में कानून व्यवस्था एवं अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस दौरान
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट, पॉक्सो अधिनियम, फास्ट ट्रैक न्यायालय, आयुध अधिनियम, आर्म्स एक्ट, टॉप-10 अपराधियों के प्रकरण, धारा 145, 152, 165 सहित
विभिन्न लंबित वादों की विस्तृत समीक्षा की गई।
डीएम ने निर्देश दिए कि गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत की गई कार्रवाई में अभियुक्तों से देय
वसूली शत प्रतिशत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने फास्ट ट्रैक न्यायालयों में दायर एवं निस्तारित वादों के
बीच अधिक अंतर पर असंतोष व्यक्त करते हुए निस्तारण की
संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अपीलों की संख्या भी बढ़ाई जाए तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट के अंतर्गत चार सौ नौ केस चल रही
है। जिसमें एक का निस्तारण हुआ है। उन्होंने कहा कि संबंधित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए
प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए। डकैती, दहेज हत्या, दुष्कर्म सहित गंभीर अपराधों के मामलों में
शीघ्र निर्णय एवं दोषियों को सजा दिलाने पर विशेष बल दिया।
आम्र्स एक्ट के मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि निचली अदालतों में गवाहों की उपस्थिति अत्यंत कम है। जिसे गंभीरता से लेते हुए सभी थाना प्रभारी कम से कम 80 प्रतिशत गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि न्यायालय में
उपस्थित होने वाले गवाहों की प्रभावी सुनवाई कराई जाए तथा आवश्यक अभिलेखीय औपचारिकताओं का भी पालन सुनिश्चित किया जाए। जिन मामलों में अभियुक्त बरी हुए हैं उनमें अपील की कार्रवाई भी समयबद्ध रूप से की जाए।
उन्होंने आयुध अधिनियम एवं आम्र्स एक्ट के प्रकरणों में समन्वित कार्रवाई करते हुए दोषसिद्धि
की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को निर्देशित किया कि आर्म्स
एक्ट के लंबित मामलों का परीक्षण कर जिला बदर की कार्रवाई योग्य व्यक्तियों की सूची उपलब्ध कराई
जाए। टॉप-10 अपराधियों के वर्षों से लंबित
मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने
अभियोजन अधिकारियों को नियमित पैरवी कर शीघ्र
निस्तारण एवं दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के निर्देश
दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अभियोजन कार्य की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए तथा उत्कृष्ट कार्य
करने वाले अभियोजन अधिकारियों को प्राथमिकता
दी जाएगी। जबकि अपेक्षित प्रदर्शन न करने वालों के
विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई होगी। मोटर वाहन
अधिनियम से संबंधित प्रकरणों में भी प्रभावी
पैरवी कर दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि उच्च
न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप चालानी प्रकरणों
का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। थाना प्रभारियों
को प्रत्येक उपजिलाधिकारी के समक्ष नियमित रूप से
चालानी प्रकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। धारा
164, 152 एवं 165 के अंतर्गत एक वर्ष से अधिक समय
से लंबित वादों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने
के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के
निर्देशानुसार भूमि विवादों का निस्तारण पुलिस
एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा स्थलीय
निरीक्षण कर समयबद्ध रूप से किया जाए।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत हुई कार्रवाई
की समीक्षा करते हुए उन्होंने अभियान चलाकर खाद्य अपमिश्रण एवं अन्य अनियमितताओं के विरुद्ध प्रभावी
कार्रवाई करने के निर्देश दिए। ’खनन एवं
ओवरलोडिंग के संबंध में जिलाधिकारी ने स्पष्ट
निर्देश दिए कि अवैध परिवहन एवं अवैध खनन के प्रति
शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप संयुक्त प्रवर्तन
दल गठित कर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
आबकारी विभाग को अवैध शराब के विरुद्ध विशेष अभियान
चलाने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि
भांग की दुकानों पर गांजा अथवा अन्य मादक
पदार्थों की बिक्री किसी भी स्थिति में नहीं
होनी चाहिए। पुलिस क्षेत्राधिकारियों एवं अग्निशमन
विभाग को निर्देशित किया गया कि बिना वैध
अनुमति संचालित कोचिंग संस्थानों एवं
लाइब्रेरी का सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में दोषी वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कराने तथा
निजी बसों एवं ट्रकों को सार्वजनिक सड़कों पर खड़ा न होने देने के भी निर्देश दिए। बैठक
के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि कानून व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने, अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने तथा शासन की मंशानुरूप प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध एवं
गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सभी संबंधित
अधिकारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी
चाहिए।
इस मौके पर अपर एसपी पीयूषकांत राय,
अभियोजन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के
अधिकारी उपस्थित रहे।





