50 लाख की इंटरलॉकिंग कार्य पर उठे सवाल, सरकारी धन की बर्बादी पर जांच की मांग तेज
प्रतापगढ़ की अंतू नगर पंचायत में पीडब्ल्यूडी की अनुमति के बिना ₹50 लाख की इंटरलॉकिंग निर्माण परियोजना विवादों में है। सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग, विभागीय समन्वय की कमी और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।

प्रतापगढ़।
अंतू नगर पंचायत द्वारा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की अनुमति के बिना करीब ₹50 लाख की लागत से कराए जा रहे इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पहले पीडब्ल्यूडी की ओर से नोटिस जारी किए जाने और जिलाधिकारी को पत्र भेजे जाने के बाद अब आमजन भी इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि संबंधित सड़क का चौड़ीकरण पहले से प्रस्तावित है और भविष्य में इंटरलॉकिंग उखाड़नी ही पड़ेगी, तो सरकारी धन खर्च करने का औचित्य क्या है?
चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि आखिर बिना विभागीय अनुमति के इतना बड़ा कार्य किस आधार पर शुरू करा दिया गया। यदि संबंधित विभागों के बीच समन्वय होता तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी धन के उपयोग से पहले तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की अनदेखी की गई?
जानकारों का कहना है कि सड़क का चौड़ीकरण होने पर नई इंटरलॉकिंग हटानी पड़ेगी। ऐसे में लाखों रुपये की सरकारी धनराशि सीधे-सीधे बर्बाद होगी। इसे लेकर लोगों में नाराजगी है और चर्चा है कि विकास कार्यों के नाम पर यदि इस तरह योजनाएं संचालित होंगी तो सरकार की मंशा और छवि दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध करा रही है ताकि जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें, लेकिन यदि बिना योजना और विभागीय समन्वय के कार्य होंगे तो उसका खामियाजा अंततः सरकारी खजाने और जनता दोनों को भुगतना पड़ेगा। लोगों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
उधर, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया है कि विभाग की अनुमति के बिना सड़क की पटरी पर इंटरलॉकिंग का कार्य कराया जा रहा है। नगर पंचायत को नोटिस जारी कर दिया गया है तथा पूरे प्रकरण से जिलाधिकारी को भी पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया गया है।
अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते इस मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो सरकारी धन के दुरुपयोग का यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है और जनता के बीच सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।





