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जनता का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत, संवाद से ही मजबूत होगी सरकार : बृजेश तिवारी सेवादार

प्रतापगढ़ के समाजसेवी बृजेश तिवारी 'सेवादार' ने लोकतंत्र में जनता के विश्वास, सरकार की जवाबदेही, संवाद की आवश्यकता और सोनम वांगचुक आंदोलन के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी शक्ति जनता का भरोसा है और समय रहते संवाद व निर्णयों की समीक्षा लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

लालगंज, प्रतापगढ़। समाजसेवी बृजेश तिवारी ‘सेवादार’ ने लोकतंत्र, सरकार की जवाबदेही और जनता के विश्वास को लेकर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत सत्ता नहीं, बल्कि जनता का विश्वास होता है। सरकारें चुनाव जीतकर बनती हैं, लेकिन इतिहास जनता का भरोसा जीतकर लिखा जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का केंद्र केवल जनता के मुद्दे रहते और उससे जुड़े विभिन्न विचारों के लोगों का एक सर्वस्वीकार्य मंच तैयार होता, तो संभव है कि उसे और अधिक व्यापक जनसमर्थन मिलता। उनका कहना था कि जब किसी आंदोलन की चर्चा उसके मूल मुद्दों से हटकर उससे जुड़े व्यक्तियों या विचारधाराओं पर केंद्रित होने लगती है, तो वास्तविक विषय पीछे छूट जाता है।
बृजेश तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार मिले जनादेश के साथ जवाबदेही भी जुड़ी होती है। उनके अनुसार, एक मजबूत नेतृत्व की पहचान केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समय रहते गलतियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने की क्षमता से भी होती है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में हर आलोचना को विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कई बार जनता की नाराजगी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार के भीतर लिए गए कुछ निर्णयों, सलाहकारों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के कार्यों को लेकर होती है। यदि ऐसी छोटी समस्याओं का समय रहते संवाद और संवेदनशीलता के साथ समाधान नहीं किया जाता, तो वे आगे चलकर बड़े राजनीतिक संकट का कारण बन सकती हैं।
समाजसेवी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी असहमति को केवल आरोपों या नारों के आधार पर खारिज करना उचित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे आंदोलन या असहमति को राष्ट्रभक्ति अथवा राष्ट्रविरोध जैसे विशेषणों में बांध देना लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि आज की जनता केवल नारों से नहीं, बल्कि परिणाम और जवाबदेही से प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि बार-बार यह कहा जाता है कि व्यवस्था में असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्व सक्रिय हैं, तो जनता के मन में यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि मजबूत शासन व्यवस्था, सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र के रहते ऐसी स्थिति उत्पन्न कैसे हुई। उनका कहना था कि जनता को तथ्यों और पारदर्शिता के साथ उत्तर मिलना चाहिए।
बृजेश तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि जनता की निराशा होती है। जब लोगों को लगता है कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही, तब राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं।
उन्होंने सरकार से संवाद बढ़ाने, आलोचना को सकारात्मक दृष्टि से लेने, निर्णयों की समीक्षा करने तथा जिनके फैसलों से सरकार और संगठन की छवि प्रभावित हुई है, उनकी जवाबदेही तय करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यही परिपक्व नेतृत्व की पहचान है।
अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होता है। जो सरकार जनता की आवाज सुनती है, वही लंबे समय तक जनता के दिलों में भी अपनी जगह बनाए रखती है।

Sanjeev Dwivedi

संजीव द्विवेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला, दैनिक जागरण, श्री टाइम्स और राष्ट्रीय स्वरूप जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में कार्य करते हुए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में दैनिक पॉड के लिए प्रतापगढ़ के लालगंज तहसील संवाददाता के रूप में कार्य कर रहे हैं।

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