
नई दिल्ली: संसद के Monsoon Session से ठीक पहले Maharashtra Politics में एक और बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। Lok Sabha Speaker Om Birla ने Uddhav Thackeray (UBT) गुट के 6 बागी सांसदों के Eknath Shinde की शिवसेना में आधिकारिक विलय (Merger) को मंजूरी दे दी है।
इस फैसले को उद्धव ठाकरे के लिए अब तक का सबसे बड़ा संसदीय झटका माना जा रहा है। लोकसभा सचिवालय के टेबल ऑफिस द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार, अब निचले सदन में शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव गुट के पास अब महज 3 सांसद बचे हैं।

एनडीए (NDA) में बढ़ा शिंदे गुट का कद, बनी दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी
लोकसभा अध्यक्ष के इस फैसले के बाद संसद के निचले सदन में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। 6 सांसदों के आने के बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना अब लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बाद एनडीए (NDA) की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन गई है। पहले नंबर पर 16 सांसदों के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) है।
किन 6 सांसदों ने बदला पाला?
संसद में दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत कार्रवाई से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। उद्धव गुट के कुल 9 सांसदों में से 6 सांसदों (यानी दो-तिहाई) ने एक साथ पाला बदला, जिसके कारण स्पीकर ने इस विलय को कानूनी तौर पर हरी झंडी दी। पाला बदलने वाले सांसदों में शामिल हैं:
- संजय उत्तमराव देशमुख
- संजय हरिभाऊ जाधव
- भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे
- ओमप्रकाश भूपालसिंह निम्बालकर
- संजय दीना पाटिल
- नागेश बापूराव पाटिल
बागी सांसदों का कहना था कि विपक्ष में रहने के कारण वे अपने क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं करा पा रहे थे, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
ममता बनर्जी को भी लगा झटका: TMC के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था
राजनीतिक गलियारों में हलचल सिर्फ महाराष्ट्र को लेकर ही नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भी बड़ा झटका लगा है। लोकसभा स्पीकर ने टीएमसी से बगावत करने वाले 20 सांसदों के लिए सदन में अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। इन बागी सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नाम से एक नया दल बनाकर एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। हालांकि, इनके विलय को अभी आधिकारिक तौर पर अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।





