सीएम योगी के सामने फूटा आरईएस टेंडर विवाद, भाजपा नेता ने थमाया शिकायत पत्र
प्रतापगढ़ दौरे के दौरान भाजपा नेता गिरधारी सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आरईएस की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का शिकायत पत्र सौंपा। उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई।

प्रतापगढ़। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रतापगढ़ दौरे के दौरान उस समय प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरधारी सिंह ने मुख्यमंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन करने के बाद ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) की कथित अनियमितताओं से जुड़ा शिकायत पत्र सीधे उनके हाथों में सौंप दिया। खास बात यह रही कि इस दौरान जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय भी मौके पर मौजूद थे, जिससे इस शिकायत को और अधिक महत्व दिया जा रहा है।
भाजपा नेता गिरधारी सिंह ने मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि आरईएस विभाग की रोजा योजना की निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की अनदेखी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के बावजूद टेंडर फॉर्म के वितरण में समान अवसर का पालन नहीं किया गया। साथ ही निविदा प्रपत्रों के साथ बिल ऑफ क्वांटिटी (BOQ) उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे सभी प्रतिभागियों को समान जानकारी नहीं मिल सकी। पत्र में कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने तथा उन्हें पात्र (Qualified) बनाने के उद्देश्य से प्रक्रिया प्रभावित किए जाने की आशंका भी जताई गई है।
गिरधारी सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि ऑनलाइन टेंडर होने के बावजूद तकनीकी और वित्तीय बिड अलग-अलग तिथियों में किस शासनादेश या सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर खोली जा रही हैं। उनका कहना है कि इससे पूरी टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, जांच पूरी होने तक आवश्यकतानुसार संबंधित टेंडर प्रक्रिया एवं कार्यादेश पर रोक लगाने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
मुख्यमंत्री के समक्ष और जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय की मौजूदगी में शिकायत पत्र सौंपे जाने की घटना अब जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस शिकायत पर क्या कदम उठाती है।





