UP Election 2027: यूपी में फिर चलेगा ‘दो लड़कों’ का जादू? अखिलेश के सीक्रेट सर्वे से आया सपा-कांग्रेस गठबंधन का ये बड़ा फॉर्मूला!
यूपी विधानसभा चुनाव के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन का नया फॉर्मूला आया सामने! अखिलेश यादव के सीक्रेट सर्वे में राहुल गांधी की कांग्रेस को मिल सकती हैं इतनी सीटें। जानिए 'मिशन 2027' का पूरा प्लान।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। साल 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2027) के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन का खाका तैयार होना शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश के भीतर बीजेपी के विजय रथ को रोकने वाली यह जोड़ी अब ‘मिशन 2027‘ के लिए तैयारी तेज दिख रही है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा कराए जा रहे एक बेहद गोपनीय और बड़े जमीनी सर्वे से इस गठबंधन को लेकर एक बड़ा सीट-शेयरिंग फॉर्मूला (Seat Sharing Formula) छनकर बाहर आया है। इस बार यूपी के रण में दोनों दल किसी भी तरह के ‘ट्रायल एंड एरर’ के मूड में नहीं हैं, बल्कि पूरी रणनीति वैज्ञानिक और डेटा-आधारित तरीके से तैयार की जा रही है।
पूर्व IAS आलोक रंजन की रिपोर्ट: कांग्रेस को मिल सकती हैं 70-75 सीटें
समाजवादी पार्टी इस बार उम्मीदवारों की लोकप्रियता और जमीनी पकड़ जानने के लिए प्राइवेट एजेंसी और स्थानीय नेताओं के फीडबैक का सहारा ले रही है। इस पूरी सर्वे टीम की कमान उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी आलोक रंजन संभाल रहे हैं।
आलोक रंजन की टीम ने जमीनी हकीकत और लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन का आकलन करने के बाद अपनी पहली रिपोर्ट अखिलेश यादव को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस रिपोर्ट में गठबंधन को मजबूत बनाए रखने और बीजेपी को कड़ी शिकस्त देने के लिए कांग्रेस को 70 से 75 सीटें देने का अहम सुझाव दिया गया है। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिहाज से कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा और सम्मानजनक आंकड़ा माना जा रहा है।
लोकसभा का ‘सक्सेसफुल मॉडल’ विधानसभा में होगा रिपीट
2024 के लोकसभा चुनाव में जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव एक साथ आए, तो यूपी के नतीजों ने देश भर को चौंका दिया था। सपा ने इस बार तय किया है कि उसी ‘विंड पैटर्न’ और सफलता के मॉडल को 2027 में भी दोहराया जाएगा।
गठबंधन के इस नए प्लान के तहत टिकट वितरण के नियम बेहद कड़े कर दिए गए हैं:
- नो सिफारिश पॉलिसी: इस बार गठबंधन में किसी भी नेता की सिफारिश या राजनीतिक रसूख के दम पर टिकट नहीं मिलेगा।
- केवल ‘जिताऊ’ को मौका: सर्वे की रिपोर्ट में जिसका जनाधार सबसे मजबूत होगा और जिसकी छवि बेदाग होगी, उसे ही गठबंधन का उम्मीदवार बनाया जाएगा-चाहे वह सपा का हो या कांग्रेस का।





