प्रयागराज

फर्जी लॉ डिग्री पर कर रहे वकालत, यूपी में 105 वकील चिन्हित, 35 लोगों पर एफआईआर

यूपी में फर्जी लॉ डिग्री के आधार पर वकालत करने वाले 105 अधिवक्ता चिन्हित किए गए हैं। इनमें 35 पर FIR दर्ज हो चुकी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई तेज हुई।

प्रयागराज ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में कथित फर्जी लॉ डिग्री के आधार पर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। बार काउंसिल ने सत्यापन के दौरान 105 ऐसे अधिवक्ताओं को चिन्हित किया है, जिनकी लॉ डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। इनमें से 35 के खिलाफ अब तक एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला ने सोमवार को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में फर्जी पाई गई लॉ डिग्रियों के आधार पर पंजीकृत अधिवक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। यह सत्यापन बार काउंसिल ऑफ इंडिया के Certificate and Place of Practice Verification Rules-2015 के तहत किया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद 105 अधिवक्ताओं की सूची तैयार

बार काउंसिल सचिव के अनुसार, हाईकोर्ट में वाद संख्या B/3/26 और याचिका संख्या 3010/20 में पारित आदेश के बाद उन अधिवक्ताओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, जिनकी डिग्रियां सत्यापन में फर्जी पाई गई हैं।

न्यायालय को उपलब्ध कराई गई मानकीकृत सूचना के आधार पर 105 अधिवक्ताओं की सूची तैयार की गई है। बार काउंसिल की ओर से इन सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्रियां भी जांच के घेरे में

बार काउंसिल सचिव आरके शुक्ला के मुताबिक, चिन्हित मामलों में बड़ी संख्या में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्रियां भी शामिल हैं। उन्होंने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी की मिलीभगत से फर्जी डिग्रियां जारी हुई हैं तो संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, किसी संस्थान या उसके कर्मचारियों की संलिप्तता अभी जांच से प्रमाणित नहीं हुई है। इस संबंध में सामने आए तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

करीब 100 मामलों में दी गई तहरीर, 35 पर एफआईआर

आरके शुक्ला ने बताया कि करीब 100 मामलों की तहरीर सिविल लाइंस थाने में उपलब्ध कराई जा चुकी है। सोमवार तक इनमें से 35 अधिवक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी। शेष मामलों में भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।

प्रयागराज के डीसीपी सिटी मनीष शांडिल्या के अनुसार, एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रत्येक अधिवक्ता और उसकी कथित फर्जी डिग्री का मामला अलग है, इसलिए अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जाएगी।

एक साथ 100 FIR नहीं, चरणबद्ध तरीके से होगी कार्रवाई

डीसीपी सिटी ने बताया कि एक साथ 100 एफआईआर दर्ज करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए मामलों को चरणबद्ध तरीके से दर्ज किया जा रहा है। दर्ज होने वाली एफआईआर की जानकारी बार काउंसिल को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

अब पुलिस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित डिग्रियां कैसे जारी हुईं, उनका इस्तेमाल बार काउंसिल में पंजीकरण के लिए किस तरह किया गया और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका रही या नहीं।

फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत करने के आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई ने प्रदेश के अधिवक्ता पंजीकरण और डिग्री सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

Sunil Somvanshi

सुनील सोमवंशी वरिष्ठ पत्रकार है,उन्हें प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मे लंबे समय का अनुभव प्राप्त है, उन्होंने राजस्थान पत्रिका, न्यूज नेशन, प्राइम न्यूज, भारत एक्सप्रेस और बंसल न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में लगातार अपनी सेवाएं दी है, वर्तमान में प्रयागराज में दैनिक पाड के संवाददाता के रूप में कार्यरत है।

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