
प्रतापगढ़।
श्रमिकों, किसानों और कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर माहौल गरमा गया। केंद्रीय श्रम संगठनों, कर्मचारी एवं किसान संगठनों के संयुक्त आह्वान पर जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान और कर्मचारी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और राज्यपाल को संबोधित 17 सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, बेरोजगारी और मजदूरों की आय को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मांग की कि 42 हजार रुपये प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम मजदूरी लागू की जाए। इसके साथ ही ट्रेड यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार की गारंटी देने की मांग भी उठाई गई।
बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्थायी रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं। केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों पर तत्काल भर्ती शुरू करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है।
निजीकरण के खिलाफ मजदूर-किसानों ने खोला मोर्चा
आंदोलनकारियों ने सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण का विरोध किया। उन्होंने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन पर रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा समाप्त करने तथा श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराने की मांग भी उठाई गई।
किसानों के लिए MSP की गारंटी की मांग
प्रदर्शन में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। किसानों ने सभी फसलों की C2+50 प्रतिशत फार्मूले के आधार पर MSP पर सरकारी खरीद की गारंटी देने की मांग की। साथ ही किसानों और गरीबों की व्यापक ऋणमाफी, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और सहकारी क्षेत्र के आधुनिकीकरण की मांग रखी गई।
बिजली के निजीकरण और विद्युत संशोधन विधेयक का विरोध
प्रदर्शनकारियों ने विद्युत संशोधन विधेयक-2025 वापस लेने और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ ही पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की आवाज भी बुलंद की।
नारों से गूंजता रहा जिला मुख्यालय
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों और किसानों ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘किसान-मजदूर-कर्मचारी एकता जिंदाबाद’, ‘महंगाई पर रोक लगाओ’, ‘श्रम संहिता वापस लो’, ‘न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दो’ और ‘भ्रष्टाचार बंद करो’ जैसे नारे लगाए। इससे जिला मुख्यालय का माहौल काफी गरम रहा।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष हेमन्त नन्दन ओझा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को श्रमिक, किसान और नौजवानों से जुड़ी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो व्यापक जन लामबंदी के साथ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।





