6.61 करोड़ का शारदा तटबंध पहली बाढ़ में ध्वस्त, ग्रामीणों के विरोध के बाद हरकत में आया सिंचाई विभाग
सीतापुर के तंबौर क्षेत्र में 6.61 करोड़ रुपये की शारदा तटबंध परियोजना पहली ही बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद सिंचाई विभाग ने मरम्मत शुरू कराई, जबकि खानामांडोर गांव में कटान आबादी के करीब पहुंच गया है।

सीतापुर:
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के तंबौर क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया शारदा नदी का तटबंध पहली ही बाढ़ की परीक्षा में क्षतिग्रस्त हो गया। जून में पूर्ण हुई 6.61 करोड़ रुपये की बाढ़ सुरक्षा परियोजना का हिस्सा कुछ ही दिनों में कट जाने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन और सिंचाई विभाग ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू कराया।
ग्रामीणों का आरोप है कि तटबंध निर्माण में अनियमितताएं हुईं, जिसके कारण पहली ही बाढ़ में परियोजना विफल साबित हुई। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया होता तो इतनी जल्दी तटबंध को नुकसान नहीं पहुंचता।
प्रदर्शन के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन
ग्रामीणों के विरोध के बाद उपजिलाधिकारी धामिनी एम. दास ने क्षतिग्रस्त तटबंध का निरीक्षण किया और तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए। इसके बाद सिंचाई विभाग के एसडीओ सुधीर कुमार और अवर अभियंता शिवम की निगरानी में मरम्मत कार्य शुरू कराया गया।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की परियोजना की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
खानामांडोर गांव पर बढ़ा कटान का खतरा
इधर खानामांडोर गांव में शारदा नदी का कटान लगातार तेज हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले एक सप्ताह में करीब तीन एकड़ धान और गन्ने की फसल नदी में समा चुकी है। कटान अब गांव की आबादी से महज 25 मीटर की दूरी पर पहुंच गया है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।
फिलहाल सिंचाई विभाग बालू से भरी बोरियां और झाड़-झंखाड़ डालकर कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। हालांकि ग्रामीण इसे अस्थायी समाधान बताते हुए स्थायी बाढ़ सुरक्षा कार्य की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो खेतों के बाद गांव की आबादी भी खतरे में पड़ सकती है।





