
प्रतापगढ़।
खरीफ सीजन के बीच जिले में डीएपी और यूरिया की बिक्री को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। किसानों का आरोप है कि कई स्थानों पर खाद निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर बेची जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि तय कीमत पर खाद आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है। मजबूरी में उन्हें अधिक दाम देकर डीएपी और यूरिया खरीदनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। छोटे और सीमांत किसानों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।
किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि खाद बिक्री केंद्रों की जांच कर कालाबाजारी और अधिक मूल्य वसूली पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो खरीफ की खेती प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, कुछ खाद विक्रेताओं का कहना है कि खुदरा स्तर पर महंगी बिक्री के पीछे थोक बाजार में अधिक कीमत पर खाद मिलना प्रमुख कारण है। उनका कहना है कि यदि थोक स्तर पर निर्धारित दर पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए तो किसानों को भी तय मूल्य पर खाद मिल सकेगी।
फिलहाल किसानों और विक्रेताओं के अलग-अलग दावों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। यदि शिकायतों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।
इस बारे में किसानों ने कृषि अधिकारी और एसडीम कुंडा से शिकायत भी की थी लेकिन मामला ढाक के पात ही रहा।





