गुरु पूर्णिमा पर प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की भव्य गुरु वंदना यात्रा, गुरु पूजा के बाद भजनों पर झूमे श्रद्धालु
प्रयागराज में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सनातनी किन्नर अखाड़े ने आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी के सम्मान में भव्य गुरु वंदना यात्रा निकाली। गुरु पूजा, शंखनाद और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्रयागराज।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी के सम्मान में भव्य गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। यात्रा में किन्नर समाज के सदस्यों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया तथा गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
सुसज्जित रथ पर विराजमान हुए आचार्य महामंडलेश्वर
गुरु वंदना यात्रा में आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी को सुसज्जित रथ पर विराजमान किया गया। रथ के आगे-आगे किन्नर समाज के सदस्य भक्ति गीत गाते, नृत्य करते और गुरु महिमा का गुणगान करते हुए आगे बढ़े। पूरे मार्ग में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा।
मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया और गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरु पूजा के बाद शिष्यों ने पांव पखारकर लिया आशीर्वाद
इस अवसर पर सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरी (टीना मां) ने अपने गुरु अंजलि मां की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद शिष्यों ने भी अपने गुरु का पूजन किया, उनके चरण पखारे और गुरु आशीर्वाद प्राप्त किया।
पूजा के बाद किन्नर शिष्यों ने रथ यात्रा निकाली तथा भक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उत्सव मनाया। इस दौरान शंखनाद और भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
‘गुरु ही जीवन का सबसे बड़ा मार्गदर्शक’
आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी ने कहा कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा, महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने वेदों और पुराणों की रचना कर मानव समाज को ज्ञान का अमूल्य उपहार दिया।
उन्होंने कहा कि इस दिन प्रत्येक शिष्य अपने गुरु में भगवान वेदव्यास के दर्शन करता है। किन्नर समाज में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है, क्योंकि गुरु ही शिष्यों का पालन-पोषण, मार्गदर्शन और जीवन निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की गुरु-शिष्य परंपरा आज भी किन्नर समाज पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभा रहा है।





