आरक्षण अधिकार भी, जिम्मेदारी भी- बृजेश तिवारी सेवादार
सामाजिक समरसता और समान अवसर के मुद्दे पर सेवादार बृजेश तिवारी ने "समान अवसर, सशक्त समाज" अभियान के तहत आरक्षण व्यवस्था, दिव्यांगजन, अनाथ बच्चों, शहीदों के आश्रितों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकारों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। प्रस्तुत है उनसे हुई विशेष बातचीत।

प्रश्न: आपने “समान अवसर, सशक्त समाज” अभियान शुरू करने की प्रेरणा कहां से ली?
बृजेश तिवारी: समाज के हर उस वर्ग की पीड़ा ने मुझे प्रेरित किया जिसे आज भी बराबरी के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। मेरा मानना है कि सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखना चाहिए।
प्रश्न: आपने आरक्षण को “अधिकार भी, जिम्मेदारी भी” क्यों कहा?
उत्तर: आरक्षण का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाना है। यह उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी भी है कि इसका लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचे।
प्रश्न: आपके चार सूत्रीय संकल्प में दिव्यांगों को विशेष स्थान दिया गया है। इसकी क्या वजह है?
उत्तर: दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें सम्मान, शिक्षा, रोजगार और उनके अधिकारों का पूरा लाभ मिलना चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रश्न: आपने अनाथ बच्चों के लिए शिक्षा और सुरक्षा की बात कही है। इस पर क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर: जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उनके भविष्य की जिम्मेदारी समाज और सरकार दोनों की है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए।
प्रश्न: आपने शहीदों के बच्चों के लिए आरक्षण की मांग की है। इसके पीछे आपकी सोच क्या है?
उत्तर: जो परिवार देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देता है, उसके बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना राष्ट्र का कर्तव्य है। उन्हें बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलने चाहिए।
प्रश्न: आपने आर्थिक आधार पर सभी गरीबों को आरक्षण देने की बात कही है। क्या यह सभी धर्मों और जातियों पर लागू होना चाहिए?
उत्तर: मेरा मानना है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो, उसे भी आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। इससे समाज में संतुलन और समानता बढ़ेगी।
प्रश्न: कुछ लोग आपके विचारों को आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग मान रहे हैं। आप क्या कहेंगे?
उत्तर: मेरा उद्देश्य किसी के अधिकार को कम करना नहीं है। मैं केवल यह चाहता हूं कि समाज के हर जरूरतमंद तक न्याय और अवसर पहुंचे।
प्रश्न: युवाओं के लिए आपका संदेश क्या है?
उत्तर: युवा जाति और धर्म से ऊपर उठकर संविधान की भावना, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण को प्राथमिकता दें। यही विकसित भारत की नींव है।
प्रश्न: समाज के लिए आपका अंतिम संदेश?
उत्तर: मेरा संकल्प स्पष्ट है—किसी के साथ भेदभाव नहीं, हर हाथ को बराबरी और सम्मान। आइए, हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएं जहां हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।



