


प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत राष्ट्रीय आंवला अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन सौंपा और जिले को राष्ट्रीय आंवला अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की।
मुलाकात के दौरान सांसद ने केंद्रीय मंत्री को प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध आंवला कैंडी और आंवला मुरब्बा भेंट किया। साथ ही उन्होंने जिले में उत्पादित आंवले की गुणवत्ता, पोषण मूल्य और औषधीय महत्व की जानकारी भी दी।
ज्ञापन में सांसद ने कहा कि प्रतापगढ़ देशभर में “आंवला नगरी” के नाम से प्रसिद्ध है। जिले के हजारों किसान आंवला उत्पादन, पौधशालाओं, प्रसंस्करण और व्यापार से जुड़े हैं। यहां विकसित उन्नत आंवला प्रजातियां देश के कई राज्यों में बागवानी को बढ़ावा दे रही हैं। इसके बावजूद आंवला जैसी महत्वपूर्ण फसल के लिए अब तक कोई समर्पित राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने लीची, केला, अनार, अंगूर और बीज मसाला जैसी फसलों के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित किए हैं, लेकिन आयुर्वेद, न्यूट्रास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के लिहाज से महत्वपूर्ण आंवले के लिए अभी तक ऐसा कोई केंद्र नहीं बनाया गया है।
सांसद अमर पाल मौर्य ने कहा कि प्रतापगढ़ में राष्ट्रीय आंवला अनुसंधान केंद्र की स्थापना होने से उन्नत एवं रोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप नई तकनीकों पर शोध, किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आंवला आधारित उद्योगों के विस्तार, गुणवत्ता प्रमाणीकरण तथा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि आधारित उद्योगों को नई गति मिलेगी।
उन्होंने केंद्र सरकार से प्रतापगढ़ को राष्ट्रीय आंवला अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी तथा भारत आंवला अनुसंधान एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।