सप्ताह भर बाद भी नहीं हुई रिलीविंग, बिजली विभाग में तबादला आदेश पर उठे सवाल
प्रतापगढ़ में बिजली विभाग के तबादला आदेश के एक सप्ताह बाद भी अवर अभियंता की रिलीविंग नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। मेडिकल अवकाश के जरिए तबादला रुकवाने की चर्चाओं के बीच विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

प्रतापगढ़। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद संबंधित अवर अभियंता को अभी तक कार्यमुक्त नहीं किए जाने से विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मामले को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य अभियंता (वितरण), प्रयागराज क्षेत्र-द्वितीय के कार्यालय से 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार प्रतापगढ़ विद्युत वितरण खंड में तैनात अवर अभियंता अरविंद कुमार का स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर विद्युत वितरण मंडल, कौशाम्बी किया गया था। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि संबंधित अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त कर नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण कराना सुनिश्चित किया जाए।
लेकिन आदेश जारी होने के करीब एक सप्ताह बाद भी संबंधित अधिकारी को रिलीव नहीं किया गया है। इससे विभागीय कर्मचारियों के बीच चर्चा का बाजार गर्म है। सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण रुकवाने के लिए मेडिकल अवकाश का सहारा लेने की तैयारी की जा रही है, ताकि आदेश के अनुपालन में देरी हो सके। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
विभागीय जानकारों का कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेश प्रशासनिक आवश्यकता के तहत जारी हुआ है, तो उसका समयबद्ध अनुपालन होना चाहिए। आदेश के पालन में अनावश्यक विलंब से न केवल शासन की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगता है, बल्कि विभागीय अनुशासन पर भी असर पड़ता है।
उधर, यह भी चर्चा है कि अधीक्षण अभियंता स्तर से अब तक कार्यमुक्ति आदेश जारी न होने के कारण मामला उलझा हुआ है। कर्मचारी और उपभोक्ता भी यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर रिलीविंग में देरी की वास्तविक वजह क्या है।
फिलहाल विभाग की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
यदि मेडिकल अवकाश अथवा अन्य किसी कारण से स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है, तो इसकी पुष्टि संबंधित अभिलेखों और विभागीय पक्ष के सामने आने के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निगम के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और स्थानांतरण आदेश का अनुपालन कब तक सुनिश्चित होता है।





